रुद्रपुर। पंतनगर स्थित नेस्ले इंडिया लिमिटेड को बड़ा झटका लगा है। फैक्टरी के मुख्य गेट के 500 मीटर के दायरे में श्रमिक संगठनों के धरना-प्रदर्शन, सभा और नारेबाजी पर रोक लगाने की मांग को अदालत ने खारिज कर दिया है। चतुर्थ अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) रुद्रपुर रवीन्द्र देव मिश्र की अदालत ने 31 अक्टूबर को सुनाए फैसले में कहा कि कंपनी अपने आरोपों को पर्याप्त साक्ष्यों के साथ साबित नहीं कर सकी।
नेस्ले इंडिया की ओर से वर्ष 2023 में मूल दीवानी वाद दायर किया गया था। कंपनी का आरोप था कि नेस्ले मजदूर संघ और नेस्ले कर्मचारी संगठन के पदाधिकारी मांगों को लेकर प्रबंधन अधिकारियों का घेराव करते हैं और फैक्टरी के कामकाज में बाधा डालते हैं। कंपनी ने 25 अगस्त 2023 की घटना का हवाला देते हुए आरोप लगाया था कि यूनियन सदस्यों ने अधिकारियों को एक घंटे से अधिक समय तक बाहर नहीं निकलने दिया। साथ ही मुख्य गेट पर प्रदर्शन से कच्चे माल और तैयार उत्पादों की आवाजाही प्रभावित होने की बात कही थी।
वहीं, यूनियनों ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा था कि श्रमिक शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें उठाते रहे हैं। अदालत ने साक्ष्यों की समीक्षा में पाया कि कंपनी के गवाहों ने उत्पादन सुचारू चलने की बात स्वीकार की। डिजिटल साक्ष्य भी विधिक रूप से साबित नहीं किए गए। अदालत ने माना कि वेतन वृद्धि और सुविधाओं के लिए शांतिपूर्ण मांग उठाना गैरकानूनी नहीं है। इसके बाद कंपनी का वाद खारिज करते हुए दोनों पक्षों को अपना-अपना वाद व्यय वहन करने के आदेश दिए।
