पीड़ित बच्ची के पुनर्वास के लिए 1 लाख रुपये के आर्थिक मुआवजे की संस्तुति
रुद्रपुर (विशेष संवाददाता):
उत्तराखंड की रुद्रपुर स्थित विशेष पॉक्सो अदालत ने 5 साल पुराने बेहद दर्दनाक और चर्चित मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए न्याय की मिसाल कायम की है। 7 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म के प्रयास और कुकृत्य के आरोपी रविन्द्र कुमार को दोषी ठहराते हुए अदालत ने 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
क्या था पूरा मामला?
यह सनसनीखेज घटना 13 अक्टूबर 2021 की शाम खटीमा थाना क्षेत्र में घटी थी। पीड़िता के पिता अपनी 7 साल की बच्ची को सड़क किनारे खड़ा कर पास की दुकान पर किसी सामान के लिए गए थे। इसी बीच आरोपी रविन्द्र कुमार बच्ची को बहला-फुसलाकर सुनसान झाड़ियों में ले गया और उसके साथ दरिंदगी का प्रयास किया। बच्ची के रोने की आवाज सुनकर आसपास के लोगों और परिजनों ने मौके पर पहुंचकर आरोपी को रंगे हाथों दबोच लिया और पुलिस के हवाले कर दिया।
अदालत का फैसला और सजा का ब्यौरा:
मामले की अंतिम सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश संगीता आर्य की कोर्ट ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अभियुक्त को दोषी पाया। कोर्ट ने अभियुक्त को निम्नलिखित सजाएं सुनाईं:
पॉक्सो अधिनियम (धारा 6): 20 वर्ष का कठोर कारावास एवं ₹50,000 जुर्माना।
भा०द०सं० (धारा 366): 10 वर्ष का कारावास एवं ₹20,000 जुर्माना।
भा०द०सं० (धारा 363): 07 वर्ष का कारावास एवं ₹10,000 जुर्माना।
अदालत ने स्पष्ट किया कि अभियुक्त की सभी सजाएं एक साथ (Concurrently) चलेंगी।
पीड़िता को आर्थिक मदद की संस्तुति:
मासूम के पुनर्वास और मानसिक संबल के लिए अदालत ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के माध्यम से ₹1,00,000 के प्रतिकर (मुआवजे) की संस्तुति की है। इसके अतिरिक्त, आरोपी पर लगाए गए कुल ₹80,000 जुर्माने में से ₹30,000 की राशि भी पीड़िता को देने के आदेश दिए गए हैं।
कानूनी संदेश:
विशेष अदालत के इस कड़े रुख से समाज में यह कड़ा और स्पष्ट संदेश गया है कि बच्चों के प्रति होने वाले किसी भी प्रकार के गंभीर अपराधों को कानून कतई बर्दाश्त नहीं करेगा।



