गदरपुर थाना क्षेत्र में स्कूल आते-जाते समय 14 वर्षीय नाबालिग छात्रा का लगातार पीछा करने और छेड़छाड़ करने के चर्चित मामले में विशेष सत्र परीक्षण/पॉक्सो कोर्ट रुद्रपुर ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश अनीता गुंज्याल की अदालत ने अभियुक्त मंजीत सिंह (पुत्र मस्तराम, निवासी कोपालाल गूलरभोज) को दोषी ठहराते हुए 3 साल के कठोर कारावास और 10,000 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने पर आरोपी को 1 माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। कोर्ट ने जुर्माने की पूरी राशि पीड़िता को प्रतिकर के रूप में देने के साथ ही राज्य सरकार को पीड़िता को 50,000 रुपये का मुआवजा प्रदान करने का आदेश दिया है।
रास्ते में बाइक से रोकता था आरोपी
मामले के अनुसार, 5 अगस्त 2021 को कक्षा 10वीं की छात्रा जब साइकिल से घर लौट रही थी, तो आरोपी मंजीत सिंह ने मोटरसाइकिल से उसका पीछा किया और सुनसान रास्ते पर रोककर अभद्र व्यवहार व छूने का प्रयास किया। छात्रा द्वारा मदद मांगने पर आरोपी धमकी देकर फरार हो गया। घर पहुंचकर पीड़िता ने परिजनों को आपबीती बताई, जिसके बाद गदरपुर थाने में धारा 354(डी) आईपीसी व पॉक्सो एक्ट की धारा 11/12 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। विवेचना में खुलासा हुआ कि आरोपी पीड़िता की बुआ का लड़का है और वह कक्षा 8 से ही छात्रा को लव लेटर देने व पीछा कर मानसिक रूप से प्रताड़ित करने में लिप्त था।
‘दिव्यांगता के आधार पर अपराध से सुरक्षा संभव नहीं’
बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपी दाहिने पैर से 50% दिव्यांग है, बाइक नहीं चला सकता और उसे पारिवारिक रंजिश में झूठा फंसाया गया है। हालांकि, कोर्ट में प्रस्तुत अभिलेखों से स्पष्ट हुआ कि आरोपी दिव्यांग क्रिकेट, स्विमिंग और वॉलीबॉल जैसे खेलों में राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभाग कर चुका है तथा पूरी तरह चलने-फिरने में सक्षम है।
विशेष न्यायाधीश ने बचाव पक्ष के तर्कों को खारिज करते हुए अपनी टिप्पणी में कहा कि मानवता के नाते दिव्यांगता के प्रति सहानुभूति हो सकती है, लेकिन कानून के अनुसार दिव्यांगता किसी को नाबालिग के लैंगिक उत्पीड़न का अधिकार नहीं देती और न ही इसके आधार पर अपराध को सुरक्षा प्रदान की जा सकती है। अदालत ने आरोपी को कस्टडी में लेकर सजायाबी वारंट के साथ उपकारागार हल्द्वानी भेजने के आदेश जारी किए।



