रूद्रपुर। ऊधम सिंह नगर की विशेष पॉक्सो अदालत ने रिश्तों को शर्मसार करने वाले एक जघन्य मामले में कड़ा फैसला सुनाते हुए सौतेली नाबालिग बेटी से दुष्कर्म करने वाले अभियुक्त को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। वहीं, अपनी बेटी की सुरक्षा में लापरवाही बरतने तथा उसके साथ मारपीट करने की दोषी पाई गई मां को भी एक वर्ष के कारावास की सजा दी गई है।
विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) अनीता गुंज्याल की अदालत ने विशेष सत्र परीक्षण संख्या 36/2023 में सुनाए गए फैसले में अभियुक्त संजय को पॉक्सो अधिनियम की गंभीर धाराओं एवं किशोर न्याय अधिनियम के तहत दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास तथा 25 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। अदालत ने अभियुक्त की पत्नी लक्ष्मी को धारा 323 आईपीसी एवं किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 के तहत दोषी मानते हुए एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। अभियोजन के अनुसार, वर्ष 2022 में सखी वन स्टॉप सेंटर की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर थाना काशीपुर में मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया कि पीड़िता के जैविक पिता की मृत्यु के बाद उसकी मां ने दूसरा विवाह किया था। आरोप है कि सौतेला पिता घर में अकेले मिलने पर लगातार पीड़िता का यौन शोषण करता था। घटना का खुलासा तब हुआ जब एक दिन पीड़िता की मां अचानक घर पहुंच गई। पीड़िता द्वारा पूरी बात बताने पर मां ने आरोपी का विरोध करने के बजाय अपनी बेटी के साथ ही मारपीट कर दी।
मामले की सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक राहुल गौतम ने चिकित्सा साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अभियोजन पक्ष को मजबूती से प्रस्तुत किया। मेडिकल रिपोर्ट में पीड़िता के शरीर पर चोटों तथा यौन उत्पीड़न के संकेतों की पुष्टि हुई। बचाव पक्ष की ओर से लगाए गए झूठे मुकदमे के तर्कों को अदालत ने खारिज कर दिया।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि पीड़िता का बयान विश्वसनीय और स्वाभाविक है। न्यायालय ने पीड़िता को राज्य सरकार की ओर से दो लाख रुपये मुआवजा दिलाने जुर्माने की राशि में से 10 हजार रुपये देने का आदेश भी दिया है।



