उत्तराखंड की जेलों में घटी कैदियों की भीड़, 5 साल में बड़ा सुधार; ओवरक्राउडिंग में देश में पहले से छठे स्थान पर पहुंचा राज्य, नई जेलों से बढ़ेगी क्षमता

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देहरादून। उत्तराखंड की जेलों में वर्षों से बनी हुई ओवरक्राउडिंग यानी क्षमता से अधिक बंदियों की समस्या पर अब काफी हद तक नियंत्रण पाया गया है। कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा विभाग द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार राज्य ने पिछले पांच वर्षों में इस दिशा में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। कभी देश में सबसे अधिक ओवरक्राउडिंग वाले राज्यों में शामिल उत्तराखंड अब छठे स्थान पर पहुंच गया है।

विभागीय आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2021 में उत्तराखंड की जेलों में बंदियों की संख्या क्षमता से 185 प्रतिशत अधिक थी और राज्य देशभर में पहले स्थान पर था। लगातार किए गए प्रयासों के बाद वर्ष 2024 तक स्थिति में सुधार आया और अब वर्ष 2026 में ओवरक्राउडिंग घटकर 118.7 प्रतिशत रह गई है।

कारागार विभाग के अनुसार इस सुधार के पीछे बुनियादी ढांचे के विस्तार और कानूनी प्रावधानों के प्रभावी उपयोग की बड़ी भूमिका रही है। उप कारागार हल्द्वानी में नई बैरकों का निर्माण किया गया है, जबकि जिला कारागार हरिद्वार में हाई सिक्योरिटी बैरक तैयार की गई है। इसके अलावा पिथौरागढ़ में नई जिला जेल को भी संचालित कर दिया गया है।

वर्तमान में देहरादून, हरिद्वार और सितारगंज जेलों के विस्तारीकरण का कार्य जारी है। वहीं चम्पावत में नई जिला कारागार का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर करीब 926 अतिरिक्त बंदियों की क्षमता विकसित होगी। साथ ही उत्तरकाशी, बागेश्वर और रुद्रप्रयाग में नई जेलों के निर्माण की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है।

उप महानिरीक्षक कारागार दधिराम ने बताया कि धारा 479 बीएनएसएस के तहत पात्र विचाराधीन बंदियों को निजी मुचलके पर रिहा किया जा रहा है। वहीं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) की मदद से ऐसे बंदियों को राहत दी जा रही है जो जमानत मिलने के बावजूद बेल बॉण्ड जमा नहीं कर पा रहे थे। विभाग का कहना है कि इन प्रयासों से जेलों में भीड़ कम होने के साथ बंदियों के सुधार और व्यवस्थाओं में भी गुणवत्ता आई है।

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