प्रसव के बाद महिला की मौत पर फूटा गुस्सा: जिला अस्पताल में ऑक्सीजन खत्म होने का आरोप, डॉक्टर गायब, परिजनों का हंगामा; जांच के आदेश, लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल

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प्रसव के बाद महिला की मौत पर बवाल: जिला अस्पताल पर लापरवाही के आरोप, जांच के आदेश

रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर)। जवाहर लाल नेहरू जिला चिकित्सालय में प्रसव के बाद एक महिला की मौत का मामला तूल पकड़ गया है। मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और स्टाफ पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल में जमकर हंगामा किया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में महिला चिकित्सक मौजूद नहीं थी, ऑक्सीजन की व्यवस्था ठप थी और समय पर रेफर तक नहीं किया गया, जिसके चलते प्रसूता की जान चली गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार सिंह कॉलोनी निवासी शिक्षक सौरभ मिश्रा अपनी गर्भवती पत्नी 28 वर्षीय ज्योति पांडे को बुधवार शाम करीब 7:30 बजे प्रसव पीड़ा होने पर जिला चिकित्सालय लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि अस्पताल में कोई महिला चिकित्सक मौजूद नहीं थी, बावजूद इसके स्टाफ ने उन्हें भर्ती कर लिया। देर रात करीब 1:30 बजे नर्सिंग स्टाफ ने ही प्रसव कराया, जिसमें ज्योति ने एक कन्या को जन्म दिया।

परिजनों के मुताबिक प्रसव के कुछ देर बाद ही ज्योति की तबीयत बिगड़ने लगी और उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी। आरोप है कि उस समय अस्पताल में रखे ऑक्सीजन सिलेंडर खाली थे और पाइपलाइन से भी ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं हो सकी। परिजनों ने महिला को अन्य अस्पताल रेफर करने की मांग की, लेकिन चिकित्सक अनुपस्थित होने के कारण रेफरल प्रक्रिया नहीं हो सकी।

मृतका के पति सौरभ मिश्रा का आरोप है कि उनकी पत्नी की मौत रात करीब 2 बजे ही हो गई थी, लेकिन अस्पताल स्टाफ ने सुबह 5 बजे इसकी जानकारी दी। उन्होंने उपचार में घोर लापरवाही और सच्चाई छिपाने का आरोप लगाते हुए पंतनगर थाना पुलिस, सीएमओ, डीएम और एसएसपी को तहरीर देकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। घटना के बाद अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना पर पहुंची सिडकुल चौकी पुलिस ने परिजनों से पूछताछ कर मामले की जानकारी ली।

वहीं, अस्पताल के पीएमएस डॉ. आर.के. सिन्हा ने बताया कि प्रसूता की हालत अचानक बिगड़ी थी। उनके अनुसार डिलीवरी सामान्य रही और अधिक रक्तस्राव भी नहीं हुआ था। बच्चे के जन्म के करीब आधे घंटे बाद महिला को गंभीर सांस की तकलीफ हुई, जिसे चिकित्सकीय भाषा में “पल्मोनरी एम्बोलिज्म” कहा जाता है। उन्होंने दावा किया कि डॉक्टरों ने महिला को बचाने के लिए ऑक्सीजन, ब्लड, इंजेक्शन और अन्य जीवनरक्षक उपचार दिए, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका।

डॉ. सिन्हा ने कहा कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराई जाएगी और यदि आवश्यकता पड़ी तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट व अन्य दस्तावेजों के आधार पर जिम्मेदारी तय की जाएगी। घटना के बाद मृतका के मायके शक्तिफार्म और ससुराल पक्ष में कोहराम मचा हुआ है।

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