रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर)। स्थानीय एसीजेएम/चतुर्थ अपर सिविल जज (सी०डि०) की अदालत ने घरेलू हिंसा के एक गंभीर मामले में पीड़िता के पक्ष में महत्वपूर्ण एकपक्षीय फैसला सुनाते हुए पति को भरण-पोषण, मकान किराया और मानसिक प्रताड़ना के एवज में हर्जाना देने का आदेश दिया है। न्यायालय के इस फैसले को घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
मामला वार्ड नंबर 32, भूरारानी निवासी श्रीमती मंजू से जुड़ा है, जिनका विवाह 14 जून 2020 को बिजनौर निवासी चेतन कुमार के साथ हुआ था। पीड़िता ने अदालत में दाखिल प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया कि विवाह के कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष ने कार और पांच लाख रुपये दहेज की मांग को लेकर उसका उत्पीड़न शुरू कर दिया। आरोप है कि पीड़िता के पिता द्वारा अलग-अलग समय पर करीब दो लाख रुपये देने के बावजूद प्रताड़ना का सिलसिला जारी रहा।
पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि गर्भावस्था के दौरान उसके साथ मारपीट की गई, जिससे उसका गर्भपात हो गया। जून 2024 में उसे मारपीट कर घर से निकाल दिया गया और दहेज की मांग पूरी न होने पर पति द्वारा दूसरी शादी की धमकी दी गई।
मामले में विपक्षीगण के अदालत में उपस्थित न होने पर न्यायालय ने एकपक्षीय सुनवाई करते हुए संरक्षण अधिकारी की रिपोर्ट और गवाहों के बयानों के आधार पर यह माना कि पीड़िता के साथ शारीरिक और मानसिक घरेलू हिंसा हुई है।
अदालत ने घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम, 2005 के तहत संरक्षण आदेश जारी करते हुए भविष्य में किसी भी प्रकार की हिंसा पर रोक लगाई है। साथ ही पति को प्रति माह 3,000 रुपये भरण-पोषण और 1,000 रुपये मकान किराया देने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त मानसिक और शारीरिक कष्ट के लिए 15,000 रुपये का एकमुश्त हर्जाना भी निर्धारित किया गया है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि भरण-पोषण और किराये की राशि वाद दायर करने की तिथि से देय होगी, जबकि हर्जाना एक माह के भीतर अदा करना होगा। आदेश की प्रति संबंधित थाना और संरक्षण अधिकारी को अनुपालन सुनिश्चित कराने के लिए भेज दी गई है।




