जिले में करोड़ों रुपये के बैंक लोन घोटाले का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें दि नैनीताल बैंक की रुद्रपुर शाखा के वरिष्ठ शाखा प्रबंधक अपूर्व पाण्डेय ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। मामला करीब 77 करोड़ 8 लाख रुपये के बंधक लोन से जुड़ा है, जिसे लेने के बाद आरोपियों ने प्लांट, मशीनरी और स्टॉक गायब कर बैंक को भारी नुकसान पहुंचाया।
प्रार्थना पत्र के अनुसार, वर्ष 2016 में रूद्रा ऑटो टेक इंजीनियरिंग प्रा. लि. ने अपने निदेशकों विशाल सिंह, स्वीटी सिंह और गीता शाह के माध्यम से विभिन्न कैश क्रेडिट और टर्म लोन खातों के जरिए बैंक से भारी भरकम ऋण लिया था। यह लोन मुख्य रूप से प्लांट और मशीनरी खरीदने तथा कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने के लिए स्वीकृत किया गया था।
लेकिन समय के साथ आरोपियों ने लोन की किश्तों का भुगतान करना बंद कर दिया, जिसके चलते 23 जनवरी 2019 को सभी खाते एनपीए घोषित कर दिए गए। इसके बाद बैंक ने सरफेसी एक्ट के तहत जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष वाद दायर किया, जिसमें बैंक के पक्ष में फैसला आया और बंधक संपत्तियों पर कब्जे के आदेश दिए गए।
मामले में एक और महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल, इलाहाबाद ने भी 3 जून 2024 को बैंक के पक्ष में निर्णय सुनाया। आदेश के अनुपालन में जब बैंक की टीम और आईआरपी 11 जून 2024 को सिडकुल पंतनगर स्थित फैक्ट्री पहुंचे, तो वहां बंधक रखी गई मशीनरी और स्टॉक पूरी तरह गायब मिले।
बैंक का आरोप है कि आरोपियों ने आपराधिक षड्यंत्र के तहत जानबूझकर बंधक संपत्तियों को गायब कर दिया और करीब 77 करोड़ रुपये की रकम का गबन कर लिया। यह सीधे तौर पर अमानत में खयानत और धोखाधड़ी का गंभीर मामला बनता है, जिससे सार्वजनिक धन को भारी नुकसान पहुंचा है।
प्रार्थी के अनुसार, इस घटना की सूचना 16 अगस्त 2024 को थाना पंतनगर को दी गई, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। इसके बाद रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से भी सूचना भेजी गई, फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। यहां तक कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी शिकायत दी गई, लेकिन मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
अब प्रार्थी ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रुद्रपुर की अदालत में धारा 318(4), 316(2), 61(2) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है। अदालत से थाना पंतनगर पुलिस को आरोपियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उचित कार्रवाई के आदेश देने की गुहार लगाई गई है।
इस पूरे मामले ने बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा और बड़े लोन वितरण की निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि आरोप साबित होते हैं, तो यह उत्तराखंड के बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जाएगा।




