हादसे के बाद अमानवीयता की हद: घायल को बचाने के बजाय शव दबाने की कोशिश, सीसीटीवी में कैद पूरी वारदात
किच्छा हाईवे पर हुए एक दर्दनाक हादसे ने मानवता को शर्मसार कर दिया। सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के प्रति देशभर में चल रहे जागरूकता अभियानों के बीच यह घटना न केवल झकझोरने वाली है, बल्कि कई गंभीर सवाल भी खड़े करती है।
जानकारी के अनुसार, फैक्ट्री कर्मी रामवीर इंटार्च फैक्ट्री से ड्यूटी खत्म कर बाहर निकले थे। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही पलों में उनकी जिंदगी एक दर्दनाक मोड़ लेने वाली है। हाईवे किनारे पैदल जा रहे रामवीर को भूसे से भरी एक अनियंत्रित ट्रैक्टर-ट्रॉली ने अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ट्रॉली उन्हें घसीटते हुए हाईवे से नीचे कच्चे रास्ते तक ले गई।
हादसे के बाद जो घटनाक्रम सामने आया, उसने सभी को स्तब्ध कर दिया। आरोप है कि ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक और उसके साथियों ने घायल को अस्पताल पहुंचाने के बजाय खुद ही यह मान लिया कि वह मर चुका है। इसके बाद उन्होंने अमानवीय कदम उठाते हुए शव को ठिकाने लगाने की कोशिश की।
घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरी वारदात कैद हो गई। फुटेज में दुर्घटना के बाद संदिग्ध गतिविधियां साफ नजर आईं। कुछ देर में वहां लोडर मशीन और कई कारें पहुंचीं, जिससे मामले ने और भी गंभीर रूप ले लिया। जब फैक्ट्री कर्मियों को घटना की भनक लगी और वे मौके पर पहुंचे, तो वहां रामवीर के दाहिने हाथ का पंजा पड़ा मिला। यह दृश्य अपने आप में भयावह था और पूरी घटना की गंभीरता को दर्शा रहा था।
सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और प्रारंभिक जांच के बाद आशंका जताई कि शव को लोडर मशीन की मदद से दबाने की कोशिश की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए फोरेंसिक टीम को भी बुलाया गया। आसपास गहन तलाशी के बाद पुलिस ने रामवीर का शव बरामद कर लिया।
इस पूरी घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सड़क हादसों में मानवीय संवेदनाएं खत्म होती जा रही हैं। जहां एक ओर सरकार और प्रशासन “गुड समैरिटन” जैसी पहल के जरिए लोगों को घायलों की मदद के लिए प्रेरित कर रहे हैं, वहीं इस तरह की घटनाएं इन प्रयासों पर सवालिया निशान लगा रही हैं।
वहीं, इस हादसे से एक और गंभीर पहलू सामने आया है। सीसीटीवी फुटेज में रात के समय भूसे से भरी ओवरहाइट ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की तेज रफ्तार और आपसी होड़ स्पष्ट दिखाई दे रही है। ट्रॉलियों में भरा भूसा बाहर तक लटकता नजर आया, जिससे सड़क पर चलना और भी खतरनाक हो जाता है। फुटेज में ट्रैक्टर चालक एक-दूसरे को पछाड़ने की कोशिश करते दिखे, जो सीधे तौर पर दुर्घटना को न्योता देने जैसा है।
इस तरह की लापरवाही और खुलेआम नियमों की अनदेखी ने पुलिस की रात्रि गश्त और कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि समय रहते इन पर अंकुश लगाया जाता, तो शायद यह हादसा टल सकता था।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस घटना ने न केवल एक परिवार से उनका सहारा छीन लिया, बल्कि समाज को यह सोचने पर भी मजबूर कर दिया है कि आखिर मानवता की असली परीक्षा के समय हम कहां खड़े हैं।




