रुद्रपुर’ 11 साल पुराने डबल मर्डर केस में बड़ा उलटफेर, उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सबूतों के अभाव में 10 आरोपियों को किया बरी, निचली अदालत की उम्रकैद सजा रद्द।

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नैनीताल से रिपोर्ट:

नैनीताल स्थित उत्तराखंड हाईकोर्ट ने ऊधम सिंह नगर जिले के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड मामले में अहम फैसला सुनाते हुए सभी 10 आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने निचली अदालत द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को निरस्त करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अपराध को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा है।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति रवींद्र मैठानी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने की। अदालत ने आरोपियों की अपील पर सुनवाई करते हुए पाया कि जांच और साक्ष्यों में कई गंभीर खामियां हैं, जिसके कारण आरोपियों को दोषी ठहराना संभव नहीं है।

यह मामला अगस्त 2014 का है, जब ऊधम सिंह नगर जिले के कुंडा थाना क्षेत्र में हरनाम सिंह उर्फ हनी और कुलवंत सिंह उर्फ गोले की गला घोंटकर हत्या कर दी गई थी। दोनों के शव जंगल में बरामद हुए थे, जिससे पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई थी। पुलिस ने इस मामले में कश्मीर सिंह, प्रकाश सिंह, चंडी सिंह, जसवंत सिंह समेत अन्य लोगों के खिलाफ हत्या और आपराधिक साजिश का मुकदमा दर्ज किया था।

लंबी सुनवाई के बाद निचली अदालत ने मई 2025 में सभी आरोपियों को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ आरोपियों ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत के समक्ष दलील दी कि पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है और साक्ष्यों की कड़ी पूरी तरह से जुड़ी हुई नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस के पास कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं था और केवल पुराने विवाद या कथित धमकियों के आधार पर किसी को हत्या का दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

विशेष रूप से प्रकाश सिंह के वकील ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल का नाम प्रारंभिक एफआईआर में भी शामिल नहीं था, इसके बावजूद बाद में उन्हें आरोपी बना दिया गया।

अदालत ने यह भी पाया कि पुलिस द्वारा बरामद की गई रस्सियां, जिन्हें हत्या में इस्तेमाल किया गया बताया गया था, उन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए कभी भेजा ही नहीं गया। ऐसे में यह साबित नहीं हो सका कि बरामद वस्तुओं का मृतकों या आरोपियों से कोई जैविक संबंध था।

सभी पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों की समीक्षा के बाद हाईकोर्ट ने प्रकाश सिंह, चंडी सिंह, लाल सिंह, बलविंदर सिंह, जसवंत सिंह (जस्सा), लखवीर सिंह, जसवंत सिंह (नंदी), भगत सिंह, प्रकाश सिंह (पासी) और दारा सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि यदि ये आरोपी किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं, तो उन्हें तत्काल जेल से रिहा किया जाए।

इस फैसले के साथ ही करीब 11 वर्ष पुराने इस चर्चित दोहरे हत्याकांड मामले का कानूनी पटाक्षेप हो गया है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि न्याय व्यवस्था में केवल संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति को अपराधी नहीं ठहराया जा सकता और दोष सिद्ध करने के लिए ठोस तथा विश्वसनीय साक्ष्य होना आवश्यक है।

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