रूद्रपुर।
न्यायालय के स्टे ऑर्डर के बावजूद कथित रूप से भूखंड पर जबरन कब्जा, तोड़फोड़ और मारपीट का मामला सामने आया है। इस प्रकरण में एक विधायक सहित कई लोगों पर न्यायालय की निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने के गंभीर आरोप लगे हैं, जिस पर अदालत ने संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया है।
बताते चलें कि याचिकाकर्ता कांता प्रसाद गंगवार ने न्यायालय को बताया कि वार्ड नंबर छह/बीस स्थित एक भूखंड पर उनका पिछले तीस वर्षों से कब्जा है। इसी भूखंड पर उनके ट्रस्ट के माध्यम से चंद्रदेव, मां काली और भैरव बाबा का मंदिर बनाया गया है। मंदिर की देखरेख के लिए ट्रस्ट द्वारा एक पुजारी भी नियुक्त किया गया था। मामले में चार अक्टूबर को न्यायालय ने उक्त भूखंड पर निषेधाज्ञा पारित की थी, जो छह जनवरी 2026 तक प्रभावी है।
याचिकाकर्ता के अनुसार स्टे ऑर्डर की जानकारी होने के बावजूद 21 दिसंबर को विधायक शिव अरोरा अपने साथियों गेदन लाल चंद्रा, राम प्रसाद चंद्रा, धर्मपाल, सत्यपाल चंद्रा, टीकाराम, ओमप्रकाश, राजेंद्र ‘पानी वाला’, विजय पाल तथा करीब 100 अज्ञात लोगों के साथ विवादित भूखंड पर पहुंचे। आरोप है कि वहां बने कमरे का ताला तोड़कर कीमती सामान और नगदी लूट ली गई तथा जमकर तोड़फोड़ की गई।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि विधायक के कहने पर पुजारी रामचंद्र के साथ लात-घूंसे से मारपीट की गई और उसका मोबाइल फोन छीन लिया गया। जब काजल गंगवार ने न्यायालय के आदेश का हवाला दिया तो विधायक कथित रूप से आगबबूला हो गए और उनके निर्देश पर काजल गंगवार व बीच-बचाव में आई मीना के साथ भी मारपीट की गई। इसे न्यायालय के आदेशों की अवमानना बताया गया है।
मामले की सुनवाई करते हुए सिविल जज सीनियर डिवीजन गुंजन सिंह ने विधायक शिव अरोरा सहित नौ नामजद आरोपियों को 23 जनवरी को अदालत में पेश होने के लिए नोटिस जारी किया है।



