खटीमा में मिली अज्ञात महिला की लाश के मामले में पुलिस ने सनसनीखेज खुलासा किया है। पुलिस ने हत्या के आरोपी ठेकेदार उदयवीर शर्मा (59 वर्ष) पुत्र खीमचंद शर्मा, निवासी ग्राम ढाकर, थाना खुर्जा, जिला बुलंदशहर को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने पूछताछ में महिला की गला दबाकर हत्या करने और शव को कट्टे में भरकर रेलवे पटरी किनारे झाड़ियों में फेंकने की बात कबूल की है।
घटना का खुलासा
1 नवंबर की रात कोतवाली खटीमा क्षेत्र के सब्जी मंडी के पीछे झाड़ियों में पीले रंग के कट्टे में एक महिला का शव मिलने से हड़कंप मच गया था। पुलिस जांच में मृतका की पहचान सुनीता (24 वर्ष) पत्नी आनंद, निवासी पकडिया, थाना झनकईया के रूप में हुई। मृतका के पिता की तहरीर पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी।
एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने दिए त्वरित अनावरण के आदेश
घटना की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ऊधमसिंहनगर श्री मणिकांत मिश्रा ने तत्काल टीमों का गठन कर मामले के खुलासे के निर्देश दिए। पुलिस ने 400 से अधिक CCTV फुटेज खंगाले, दर्जनों लोगों से पूछताछ की और मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया।
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि 30 अक्टूबर की शाम मृतका को उदयवीर शर्मा अपनी बाइक पर बैठाकर ले गया था। अगले ही दिन उसने अपना किराए का कमरा खाली कर दिया। शक गहराने पर पुलिस ने उसे हिरासत में लिया।
आरोपी ने कबूला जुर्म
पूछताछ में उदयवीर शर्मा ने बताया कि सुनीता से उसका पुराना परिचय था। 30 अक्टूबर को वह उसे अपने किराए के कमरे पर ले गया था। मृतका द्वारा शराब पीने, पैसे मांगने और झूठा मुकदमा करने की धमकी देने पर उसने गुस्से में आकर उसका गला और मुंह दबाकर हत्या कर दी।
बेटी की शादी (22 नवंबर 2025) और बदनामी के डर से उसने अपनी महिला मित्र और एक अन्य व्यक्ति की मदद से शव को पीले कट्टे में भरकर रेलवे पटरी के पास झाड़ियों में फेंक दिया।
बरामदगी
आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त मोटरसाइकिल, आरोपी के कपड़े और मृतका के कपड़ों से संबंधित अन्य साक्ष्य बरामद किए हैं। आरोपी को न्यायालय में पेश कर रिमांड पर भेजा जा रहा है।
एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने कहा कि महिला सुरक्षा पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अपराधियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
पुलिस टीम में शामिल अधिकारी:
प्रभारी निरीक्षक वीरेन्द्र शाह, देवेन्द्र गौरव, उपनिरीक्षक ललित रावल, अशोक कांडपाल, विकास कुमार, भूपेन्द्र सिंह, पंकज महर, महिला कांस्टेबल सुनीता व पूजा, तथा एसओजी टीम के हेड कांस्टेबल रविन्द्र बिष्ट व अन्य सदस्य।
पुलिस की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई से हत्या का मामला 9 दिनों में सुलझ गया।



