नकली शुगर दवा फैक्ट्री का भंडाफोड़: आयुर्वेद के नाम पर मिलाई जा रही थीं एलोपैथिक दवाएं, आरोपी गिरफ्तार
(स्थान)। नगर पंचायत क्षेत्र में एक साधारण से मकान में चल रही नकली दवा बनाने की फैक्ट्री का प्रशासन ने पर्दाफाश किया है। सोमवार रात एसडीएम ऋचा सिंह के नेतृत्व में की गई छापेमारी में टीम ने मौके से भारी मात्रा में संदिग्ध दवाइयां, उपकरण और वन्यजीव अवशेष बरामद करते हुए मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
प्रशासनिक टीम के अनुसार, आरोपी की पहचान स्वरूप सिंह के रूप में हुई है, जो शुगर नियंत्रण के नाम पर आयुर्वेदिक दवा तैयार कर बाजार में बेच रहा था। जांच में खुलासा हुआ कि वह तथाकथित आयुर्वेदिक चूर्ण में एलोपैथिक दवाओं को पीसकर मिलाता था, जिससे मरीजों का शुगर स्तर तेजी से नियंत्रित होता दिखता था। इसी ‘तुरंत असर’ के चलते उसकी दवा की मांग कई राज्यों में बढ़ गई थी।
छापेमारी के दौरान मौके से अंग्रेजी दवाओं के पैकेट, तैयार पाउडर, दवा बनाने के उपकरण और हिरण के सींग बरामद किए गए। अधिकारियों के मुताबिक, इन सींगों की भस्म बनाकर भी दवा में मिलाई जाती थी, जो गंभीर कानूनी उल्लंघन है।
एसडीएम ऋचा सिंह ने बताया कि कार्रवाई में अपर आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. दीपक कुमार सरकार और औषधि निरीक्षक शुभम कोटनाला की टीम भी शामिल रही। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया है कि उसका नेटवर्क उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, असम, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों तक फैला हुआ है, जबकि कुछ ग्राहक विदेशों में भी हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग भी सक्रिय हो गया है। वन क्षेत्राधिकारी रूप नारायण गौतम ने हिरण के सींग की बरामदगी के बाद वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत अलग से जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपी सींग कहां से लाता था और अब तक कितनी मात्रा में इसका इस्तेमाल कर चुका है।
फिलहाल पुलिस और संबंधित विभाग पूरे नेटवर्क की जांच में जुटे हैं। यह खुलासा न सिर्फ स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़, बल्कि वन्यजीव कानूनों के उल्लंघन का भी बड़ा मामला बनता जा रहा है।



