रुद्रपुर। लोन दिलाने के नाम पर कारोबारी से लिए गए दस्तावेज और ब्लैंक हस्ताक्षरित चेक के बाद उसके बैंक खाते से करोड़ों रुपये के लेनदेन का मामला सामने आया है। कारोबारी ने बैंक मैनेजर और अन्य लोगों पर मिलीभगत कर खाते के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए न्यायालय में शिकायत की थी। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने बैंक मैनेजर के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
रायल ग्रीन अपार्टमेंट दानपुर निवासी कारोबारी रूपचंद्र सिंह के मुताबिक उन्होंने वर्ष 2020 में अपनी फर्म रूपचंद्र सिंह एंड कंपनी के नाम से इंडसइंड बैंक की आवास विकास शाखा में चालू खाता खोला था। मार्च 2024 में कारोबार के लिए लोन की जरूरत पड़ने पर उन्होंने बैंक मैनेजर देवेंद्र सिंह से संपर्क किया। आरोप है कि लोन प्रक्रिया के नाम पर मैनेजर ने उनसे आधार कार्ड, पैन कार्ड, फोटो और तीन ब्लैंक हस्ताक्षरित चेक लिए। कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने के साथ मोबाइल पर आए ओटीपी भी लिए गए और खाते में इंटरनेट बैंकिंग सुविधा शुरू कराई गई।
कुछ दिन बाद लोन की जानकारी लेने पर कारोबारी को लोन निरस्त होने की बात बताई गई। उनका कहना है कि 15 अप्रैल 2024 के बाद उन्होंने खाते से कोई लेनदेन नहीं किया। बाद में पुलिस का नोटिस मिलने पर उन्हें छत्तीसगढ़ में दर्ज साइबर अपराध की प्राथमिकी की जानकारी हुई।
बैंक से खाते का विवरण लेने पर पता चला कि 28 मई 2024 से 17 फरवरी 2025 के बीच अलग-अलग तिथियों में खाते से करोड़ों रुपये का लेनदेन हुआ। कारोबारी का कहना है कि उसे इन लेनदेन की जानकारी नहीं थी और पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भी कोई संदेश नहीं आया।
कारोबारी ने आरोप लगाया कि खाते के दुरुपयोग के चलते उसे कानूनी कार्रवाई और जेल का सामना करना पड़ा। थाना ट्रांजिट कैंप और रुद्रपुर में शिकायत के बाद कार्रवाई न होने पर उसने न्यायालय की शरण ली। कोर्ट के आदेश पर अब पुलिस ने बैंक मैनेजर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
