ऊधम सिंह नगर में GST का सबसे बड़ा छापा, 150 करोड़ की टैक्स चोरी उजागर, 19.83 करोड़ मौके पर वसूले, 76 करोड़ का स्टॉक सीज, AI से खुला फर्जीवाड़ा

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सितारगंज में जीएसटी का मेगा रेड, 150 करोड़ की कर चोरी का खुलासा

सितारगंज। उत्तराखंड में जीएसटी विभाग की विशेष जांच शाखा (SIB) ने अब तक की सबसे बड़ी एकदिवसीय कार्रवाई करते हुए एक बड़े औद्योगिक समूह पर शिकंजा कस दिया। ट्रांसफॉर्मर और संबद्ध सेवाओं से जुड़े इस समूह पर छापेमारी में 150 करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी का खुलासा हुआ है, जबकि मौके पर ही 19.83 करोड़ रुपये का जीएसटी जमा कराया गया।

कार्रवाई का नेतृत्व जीएसटी आयुक्त सोनिका सिंह ने किया। संयुक्त आयुक्त रोशन लाल और जोनल अपर आयुक्त राकेश वर्मा के निर्देशन में 32 अधिकारियों की टीम ने सुनियोजित तरीके से छापा मारा।

8 घंटे की कार्रवाई, 76 करोड़ का स्टॉक सीज

18 मार्च 2026 को तीन टीमों ने एक साथ फैक्ट्री परिसर में छापेमारी की। करीब आठ घंटे चली इस कार्रवाई में बिक्री, स्टॉक, खरीद और वित्तीय लेनदेन से जुड़े अहम दस्तावेज जब्त किए गए। फैक्ट्री में मौजूद करीब 76 करोड़ रुपये के स्टॉक को जांच के दायरे में लेकर सीज कर दिया गया है।

डिमर्जर के बाद भी जारी रहा खेल

जांच में सामने आया कि कंपनी ने एनसीएलटी के माध्यम से डिमर्जर कर पुरानी कंपनी में कारोबार बंद दिखाया, जबकि वास्तविक गतिविधियां जारी रहीं। पिछले 6-7 महीनों में 150 करोड़ रुपये से अधिक का माल खरीदा गया, लेकिन जीएसटी पोर्टल पर ‘निल’ बिक्री दिखाकर टैक्स से बचने की कोशिश की गई।

बैंक लेनदेन और माल की आवाजाही से खुलासा

कागजों में कारोबार शून्य दिखाने के बावजूद बैंक खातों में भारी लेनदेन जारी था। दक्षिण भारत से माल सितारगंज लाकर महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश भेजा जा रहा था।

सरकारी टेंडरों में सप्लाई, फर्जी बिलिंग के संकेत

ज्यादातर सप्लाई बिजली वितरण निगमों और ऊर्जा विभागों को टेंडर के जरिए की गई। जांच में कीमतों में हेराफेरी और फर्जी बिक्री बिल मिलने के संकेत भी मिले हैं।

AI और टेक्नोलॉजी से खुला फर्जीवाड़ा

पूरे मामले का खुलासा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस सॉफ्टवेयर, RFID तकनीक और डेटा एनालिसिस के जरिए हुआ। विभाग ने डमी कंपनी बनाकर भी साक्ष्य जुटाए।

एक दिन की सबसे बड़ी रिकवरी

मौके पर 19.83 करोड़ रुपये की टैक्स वसूली उत्तराखंड जीएसटी इतिहास की सबसे बड़ी एकदिवसीय रिकवरी मानी जा रही है।

फिलहाल जांच जारी है और विभाग ने कंपनी समूह व निदेशकों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। आने वाले दिनों में बड़े खुलासे की संभावना जताई जा रही है।

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