ईद से पहले रुद्रपुर में ईदगाह जमीन विवाद गरमाया, अतिक्रमण हटने के बाद नमाज़ की जगह पर संकट, 20 हजार नमाज़ियों के सामने सवाल—इस बार ईद की नमाज़ कहां होगी?

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रुद्रपुर: ईद से पहले रुद्रपुर में ईदगाह की जमीन को लेकर नया विवाद सामने आ गया है। खेड़ा स्थित ईदगाह के पास सरकारी जमीन से प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद मुस्लिम समुदाय के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि इस साल ईद-उल-फितर और ईद-उल-अजहा की सामूहिक नमाज़ आखिर कहां अदा की जाएगी। कई दशकों से इसी स्थान पर हजारों लोग एक साथ नमाज़ पढ़ते आए हैं।

जानकारी के अनुसार 7–8 दिसंबर 2025 की रात और सुबह नगर निगम, राजस्व विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने खेड़ा क्षेत्र में स्थित ईदगाह के पास करीब 8 एकड़ सरकारी (नजूल) भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी। ड्रोन सर्वे के बाद की गई इस कार्रवाई में अवैध रूप से बनाई गई चारदीवारी को बुलडोजर से ध्वस्त कर जमीन को प्रशासन ने अपने कब्जे में ले लिया था। कार्रवाई के दौरान किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचने के लिए इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।

प्रशासन का कहना है कि ईदगाह के आसपास की यह जमीन सरकारी थी, जिस पर अवैध कब्जा किया गया था। अतिक्रमण हटाने के बाद अब यह जमीन नगर निगम के नियंत्रण में है।

वहीं इस कार्रवाई के बाद शहर के मुस्लिम समुदाय में चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले करीब 50 से 60 वर्षों से खेड़ा स्थित इसी ईदगाह में ईद-उल-फितर और ईद-उल-अजहा की नमाज़ अदा की जाती रही है। हर साल यहां करीब 15 से 20 हजार नमाज़ी एक साथ नमाज़ पढ़ते हैं, लेकिन अब जमीन का बड़ा हिस्सा प्रशासन के कब्जे में जाने के कारण इतनी बड़ी संख्या में नमाज़ अदा करने को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है।

इस मामले में उत्तराखंड हज कमेटी के पूर्व अध्यक्ष जाहिद रजा रिजवी ने भी चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि ईद में अब ज्यादा समय नहीं बचा है, इसलिए प्रशासन को जल्द कोई स्थायी समाधान निकालना चाहिए, ताकि लोग शांति और व्यवस्थित तरीके से नमाज़ अदा कर सकें।

दूसरी ओर रुद्रपुर के महापौर विकास शर्मा का कहना है कि यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत की गई है और सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है। उनका कहना है कि यदि नगर निगम उसी जमीन पर दोबारा नमाज़ की अनुमति देता है तो अन्य समुदाय भी इसी तरह की मांग कर सकते हैं।

महापौर ने सुझाव दिया कि शहर की विभिन्न मस्जिदों में नमाज़ अदा की जा सकती है और जरूरत पड़ने पर शिफ्ट बनाकर नमाज़ पढ़ी जा सकती है। वहीं मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में नमाज़ियों के लिए मस्जिदों में पर्याप्त जगह नहीं है। इसी को लेकर शहर की विभिन्न मस्जिदों के इमामों और मुस्लिम प्रतिनिधियों ने जिलाधिकारी नितिन भदौरिया से मुलाकात कर इस मामले में स्थायी समाधान की मांग की है।

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