वैश्विक तनाव के बीच केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, एलपीजी उत्पादन बढ़ाने और घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के निर्देश
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ईंधन आपूर्ति श्रृंखला में आ रही बाधाओं के बीच भारत सरकार ने देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने देश की तेल रिफाइनरियों को तत्काल प्रभाव से एलपीजी उत्पादन बढ़ाने और उसे प्राथमिकता के आधार पर घरेलू उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के निर्देश जारी किए हैं।
मंत्रालय के अनुसार वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति में अनिश्चितता को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। सरकार की प्राथमिकता देश के लगभग 33 करोड़ घरेलू गैस कनेक्शन धारकों को बिना रुकावट एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित करना है। रिफाइनरियों से कहा गया है कि उत्पादन में होने वाली अतिरिक्त वृद्धि को सीधे घरेलू वितरण प्रणाली में भेजा जाए ताकि आम उपभोक्ताओं को किसी तरह की दिक्कत न हो।
इसके साथ ही बाजार में गैस की किल्लत की अफवाहों और संभावित जमाखोरी को रोकने के लिए सरकार ने एलपीजी बुकिंग प्रणाली में भी बदलाव किया है। अब घरेलू उपभोक्ताओं के लिए दो सिलेंडर रिफिल बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिनों का अंतराल अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे सिलेंडरों की जमाखोरी पर रोक लगेगी और आपूर्ति का संतुलित वितरण सुनिश्चित होगा।
वहीं केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के प्रावधानों का उपयोग करते हुए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति को विनियमित करने का निर्णय भी लिया है। इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के बावजूद देशभर में ईंधन की समान उपलब्धता बनाए रखना है।
गैर-घरेलू क्षेत्र के लिए भी नई प्राथमिकताएं तय की गई हैं। अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को आयातित एलपीजी की आपूर्ति में शीर्ष प्राथमिकता दी जाएगी। वहीं होटल, रेस्टोरेंट और अन्य कमर्शियल सेक्टर की आपूर्ति की निगरानी के लिए तेल विपणन कंपनियों के तीन कार्यकारी निदेशकों की एक उच्च-स्तरीय समिति गठित की गई है।
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत की ऊर्जा रणनीति लचीली है और सरकार वैकल्पिक मार्गों से ऊर्जा आयात सुनिश्चित कर रही है, ताकि देशवासियों को किसी भी तरह की कमी का सामना न करना पड़े।




