पौड़ी।
उर्मिला सनावर के हालिया वीडियो के बाद अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उठ रहे सवालों पर पूर्व पौड़ी एएसपी और एसआईटी सदस्य रहे शेखर सुयाल ने खुलकर जवाब दिए हैं। शनिवार 3 जनवरी को मीडिया से बातचीत में उन्होंने न सिर्फ एसआईटी जांच का बचाव किया, बल्कि वीआईपी से जुड़े विवाद पर भी तथ्य सामने रखे।
शेखर सुयाल ने स्पष्ट किया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच एसआईटी द्वारा पूरी पारदर्शिता और तथ्यों के आधार पर की गई थी। उन्होंने कहा कि एसआईटी की जांच को ट्रायल कोर्ट के साथ-साथ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी सही ठहराया है। इसी जांच के आधार पर तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई, और वे आज भी जेल में बंद हैं।
वीआईपी को लेकर उठ रहे सवालों पर शेखर सुयाल ने बताया कि जांच के दौरान आरोपियों की आपसी चैट में एक वीआईपी का जिक्र सामने आया था। इसके बाद एसआईटी ने अंकिता के मित्र से पूछताछ की, जिसने बताया कि 16 सितंबर 2022 को रिसॉर्ट में सुरक्षाकर्मियों के साथ एक व्यक्ति आया था। रिसॉर्ट स्टाफ की पुष्टि के आधार पर एसआईटी नोएडा निवासी धर्मेंद्र उर्फ प्रधान तक पहुंची। पूछताछ में उसने जमीन के सिलसिले में क्षेत्र में आने और कुछ देर रिसॉर्ट में भोजन करने की बात कही, जिसे जांच में सही पाया गया।
शेखर सुयाल ने बताया कि 18 सितंबर 2022 की रात करीब 9 बजे अंकिता का फोन बंद हुआ, जो हत्या का समय माना गया। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे अंकिता पर “एक्स्ट्रा सर्विस” का दबाव बना रहे थे, जिसके लिए वह तैयार नहीं थी। इसके बाद उसे गंगा में धक्का देकर मार दिया गया।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सबूतों से कोई छेड़छाड़ नहीं हुई। 22 सितंबर को केस पुलिस को मिलने के बाद कमरे को सील किया गया और 23 सितंबर को एफएसएल टीम ने मौके पर पहुंचकर सभी साक्ष्य जुटाए। उन्हीं ठोस सबूतों के आधार पर अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराया।




