उधम सिंह नगर। ट्रांजिट कैंप थाना पुलिस की एक बड़ी चूक ने जिले के अधिकारियों को मुश्किल में डाल दिया है। पॉक्सो एक्ट के एक मामले में पुलिस ने वास्तविक आरोपी की जगह उसी नाम के एक अधिवक्ता को गलतफहमी में हिरासत में ले लिया और कई घंटों तक उससे पूछताछ करती रही। मामला सामने आने के बाद अधिवक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा और जिले में माहौल गर्म हो गया।
घटना 11 दिसंबर की है, जब ट्रांजिट कैंप थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति ने मयंक शर्मा नामक युवक पर नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए तहरीर दी। आरोपी की तलाश में पुलिस हरकत में आई और गलती से अधिवक्ता मयंक शर्मा को कोर्ट परिसर के बाहर से उठा लिया। पुलिस पूछताछ के दौरान कथित तौर पर अभद्रता भी करती रही और देर रात माफी मांगकर अधिवक्ता को छोड़ दिया।
जैसे ही घटना की जानकारी अधिवक्ता समाज को मिली, वे भड़क उठे। सुबह कोर्ट खुलते ही सभी वकील हड़ताल पर बैठ गए और कोर्ट परिसर में पुलिस के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। अधिवक्ताओं ने आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की और चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं होती तो विरोध और तेज होगा।
स्थिति तब और बिगड़ गई जब नाराज अधिवक्ताओं ने राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित कर दिया, जिससे आम जनता घंटों परेशान रही। मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने अधिवक्ताओं से बातचीत कर मामले को शांत करने की कोशिश की, लेकिन उनकी मुख्य मांग—पुलिस की सार्वजनिक माफी और दोषी पुलिसकर्मियों का निलंबन—अब भी बनी हुई है।
फिलहाल पुलिस प्रशासन इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए है, जबकि अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि उचित कार्रवाई न होने पर अगला कदम और कठोर होगा। घटना के बाद जिले की पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं और विभागीय जांच की मांग तेज हो गई है।




