हल्द्वानी के निजी स्कूलों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत प्रवेश पाने के लिए किए गए कई आवेदनों में आय प्रमाण पत्र प्रशासन की जांच में भी फर्जी पाए गए। दो स्थाई निवास प्रमाण पत्र में भी गड़बड़ी मिली है। इस पर प्रशासन आवेदन करने वाले 17 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने जा रहा है। एसडीएम हल्द्वानी राहुल साह ने तहसीलदार मनीषा बिष्ट को मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए हैं।
डीएम वंदना के आदेश पर प्रशासन ने आय प्रमाण पत्रों की जांच की, जिसमें 17 प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं। वहीं पूर्व में बीईओ कार्यालय हल्द्वानी की जांच में खुलासा हुआ था कि अपने बच्चों को मुफ्त शिक्षा दिलाने के लिए सक्षम अभिभावकों ने जाली आय प्रमाण पत्र का सहारा लिया। 18 आय प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए थे। प्रशासनिक अफसरों ने बताया कि जिन लोगों ने अपने बच्चे के प्रवेश के लिए आवेदन किया, उसमें लगाए गए आय प्रमाण पत्र स्कैन करने पर किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर पाए गए। अभिभावकों ने दूसरों के प्रमाण पत्र को एडिट कर अपने बच्चों के आवेदन फार्म में लगाया था।
कमजोर बच्चों का हक क्यों छीना जा रहा है?
निजी स्कूलों में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत 25 फीसदी सीटें वंचित और कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित हैं। हर साल नर्सरी और कक्षा एक में इन बच्चों को प्रवेश दिया जाता है। प्रवेश के बाद कक्षा आठ तक मुफ्त शिक्षा प्रदान की जाती है, जिसका खर्च सरकार वहन करती है। इसके लिए सामान्य वर्ग के अभिभावकों की वार्षिक आय सीमा 55,000 रुपये निर्धारित है। लेकिन शहर में निर्धन परिवारों के बच्चों को इस लाभ से वंचित किया जा रहा है। आय प्रमाण पत्र में फर्जीवाड़ा इस बात की ओर तस्दीक कर रहा है।
शिक्षा विभाग से मिले आय प्रमाण पत्रों की जांच की गई। 17 आय प्रमाण फर्जी पाए गए हैं वहीं दो स्थाई निवास प्रमाण पत्र में भी गड़बड़ी मिली है। ऐसे में 17 लोग जिन्होंने कूटनीति कर दूसरों के आय प्रमाण पत्र में छेड़छाड़ की, उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश तहसीलदार हल्द्वानी को दिए गए हैं।
राहुल साह, एसडीएम हल्द्वानी


