करीब 14 साल पुराने चोरी के एक मामले में रुद्रपुर की द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए दोषियों की सजा में राहत दी है। अदालत ने अशोक शर्मा और अबरार हुसैन को दोषी तो बरकरार रखा, लेकिन उन्हें जेल भेजने के बजाय ‘अच्छे आचरण की परिवीक्षा’ पर रिहा करने का आदेश दिया।
मामला 9 जून 2012 की रात का है, जब सितारगंज के वार्ड नंबर 11 निवासी सगीर अहमद के घर में चोरी हुई थी। चोरों ने करीब साढ़े तीन लाख रुपये के जेवर, नकदी, मोबाइल और कैमरा चोरी कर लिया था। पुलिस ने जांच के बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके पास से चोरी का सामान बरामद किया था।
निचली अदालत ने वर्ष 2020 में दोनों को भारतीय दंड संहिता की धारा 411 के तहत दोषी मानते हुए दो-दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ आरोपियों ने जिला अदालत में अपील दायर की थी।
द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मीना देउपा ने सुनवाई के दौरान पाया कि पुलिस की बरामदगी और गवाहों के बयान पर्याप्त और विश्वसनीय हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोषसिद्धि में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है।
हालांकि, आरोपियों की कम उम्र और यह उनका पहला अपराध होने को देखते हुए अदालत ने ‘परिवीक्षा अधिनियम, 1958’ के तहत राहत दी। अदालत ने जेल की सजा रद्द करते हुए दोनों को एक वर्ष के लिए अच्छे आचरण की शर्त पर छोड़ने का आदेश दिया। साथ ही, प्रत्येक आरोपी को 30 हजार रुपये का निजी बंधपत्र भरने को कहा गया है।
अदालत ने चेतावनी दी कि यदि शर्तों का उल्लंघन हुआ, तो सजा दोबारा लागू की जाएगी। यह फैसला सुधारात्मक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।




