भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव एवं उत्तराखंड में पार्टी मामलों के प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम ने चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में अपना नाम जोड़े जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पूर्व सांसद दुष्यंत गौतम ने मीडिया के सामने आकर अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बिना किसी ठोस सबूत के किसी व्यक्ति की छवि खराब करना न केवल गलत है, बल्कि यह कानूनन अपराध भी है।
दुष्यंत गौतम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि उनके खिलाफ कोई भी प्रमाण मौजूद है, तो उसे सार्वजनिक मंचों पर बयानबाज़ी करने के बजाय सीधे न्यायालय के समक्ष पेश किया जाना चाहिए। उन्होंने दो टूक कहा, “अगर कोई यह साबित कर दे कि मैं गली तक भी गया हूँ, तो मैं स्वयं को गुनहगार मानने को तैयार हूं।”
उन्होंने अपने खिलाफ वायरल किए जा रहे वीडियो को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। दुष्यंत गौतम ने कहा कि जिस व्यक्ति द्वारा वीडियो वायरल किया जा रहा है, उसे वे व्यक्तिगत रूप से जानते तक नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि वीडियो बनाने वाले व्यक्ति ने स्वयं स्वीकार किया है कि यह वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जनरेट किया गया है। ऐसे में इस तरह के फर्जी और भ्रामक वीडियो के आधार पर किसी पर आरोप लगाना पूरी तरह दुर्भावनापूर्ण है।
अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर दुष्यंत गौतम ने कहा कि यह बेहद संवेदनशील मामला है और इस पर राजनीति या भाषणबाज़ी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा, “एक बेटी की हत्या हुई है, उसे न्याय मिलना चाहिए। यदि किसी के पास कोई भी सबूत है, तो उसे तुरंत अदालत में पेश किया जाए। दोषी चाहे कोई भी हो, उसे कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए, यहां तक कि फांसी भी।”
अंत में उन्होंने मीडिया और राजनीतिक दलों से अपील की कि वे अफवाहों और फर्जी वीडियो के आधार पर माहौल खराब न करें और लोकतंत्र में न्यायपालिका की सर्वोच्चता का सम्मान करते हुए कानून के दायरे में ही हर विवाद का समाधान करें।


