दहेज उत्पीड़न से आत्महत्या को मजबूर करने का मामला: पति और सास को आठ साल की सजा

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सितारगंज। दहेज प्रताड़ना के एक गंभीर मामले में अदालत ने पति और सास को दोषी ठहराते हुए कड़ा संदेश दिया है। शक्ति फार्म, सितारगंज निवासी अधीर बैरागी द्वारा दर्ज कराए गए प्रकरण में न्यायालय ने माना कि विवाहिता को लगातार प्रताड़ित कर आत्महत्या के लिए मजबूर किया गया।

एडीजीसी दांडिक अनिल सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि अधीर बैरागी ने 13 अगस्त 2017 को पुलिस को तहरीर देकर अपनी बेटी सपना बैरागी के साथ हुई घटनाओं का विवरण दिया था। सपना की शादी 21 मई 2013 को उकरौली, सितारगंज निवासी जयदेव गुप्ता के साथ हुई थी। शादी के कुछ समय बाद ही सपना को एक बेटा हुआ, जो घटना के समय लगभग डेढ़ वर्ष का था।

आरोप के अनुसार, विवाह के बाद से ही सपना को उसके पति जयदेव गुप्ता, सास लक्ष्मी देवी और देवर सुखदेव गुप्ता द्वारा बाइक की मांग को लेकर लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। परिवार ने कई बार समझाने का प्रयास किया, लेकिन उत्पीड़न बंद नहीं हुआ।

2 अगस्त 2017 को मायके पक्ष को सूचना मिली कि सपना आग से बुरी तरह झुलस गई है और उसे सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर किया गया है। अस्पताल पहुंचने पर सपना ने अपने पिता को बताया कि उस पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी गई। गंभीर रूप से झुलसी सपना की 10 अगस्त 2017 को उपचार के दौरान मृत्यु हो गई। इसके बाद पुलिस ने तहरीर के आधार पर धारा 498ए और 302 के तहत मुकदमा दर्ज किया।

इस मामले की सुनवाई द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मीना देऊपा की अदालत में हुई। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी दीपक सिंह ने 17 गवाह प्रस्तुत किए। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने पति जयदेव गुप्ता और सास लक्ष्मी गुप्ता को दहेज प्रताड़ना का दोषी मानते हुए आठ वर्ष के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं, देवर सुखदेव गुप्ता को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया।

अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि विवाहिता को निरंतर प्रताड़ित कर आत्महत्या के लिए विवश करना गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है।

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