रुद्रपुर। लॉकडाउन के दौरान आर्थिक तंगी ने सोहन सिंह को चोरी के रास्ते पर धकेल दिया। उसने फैक्टरी से लोहे का सामान और पुली चोरी की, लेकिन चोरी करते हुए ही पकड़ा गया। करीब छह साल बाद अदालत में मामले का फैसला हुआ तो दोषसिद्धि के साथ मानवीय पहलू भी सामने आया। अभियुक्त ने खुद स्वीकार किया कि लॉकडाउन की आर्थिक मजबूरी में उससे यह गलती हुई थी। अदालत ने उसे धारा 454 और 411 में दोषी ठहराते हुए तीन माह 10 दिन के साधारण कारावास और कुल दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
मामला 22 मई 2020 का है। धौलपुर स्थित दयाल सीड्स/दयाल इंडस्ट्रीज के संचालक प्रभशरन सिंह ने रुद्रपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि दोपहर करीब साढ़े तीन बजे सोहन सिंह फैक्टरी परिसर में घुसकर लोहे का सामान और पुली बाहर निकाल रहा था। शोर सुनकर उन्होंने मौके पर पहुंचकर उसे सामान समेत पकड़ लिया और 112 नंबर पर सूचना देकर पुलिस के सुपुर्द कर दिया।
मामले की सुनवाई न्यायिक मजिस्ट्रेट/सिविल जज (जू.डि.) प्रतीक मथेला की अदालत में हुई। अभियोजन की ओर से सहायक अभियोजन अधिकारी मनोज राय ने पैरवी की। सुनवाई के दौरान बरामदगी और अन्य साक्ष्य अदालत के समक्ष रखे गए।
धारा 313 के बयान में सोहन सिंह ने चोरी की बात स्वीकार करते हुए बताया कि लॉकडाउन के दौरान आर्थिक तंगी के चलते उसने चोरी की थी और उससे गलती हुई। अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर उसे धारा 454 और 411 में दोषी माना, जबकि धारा 380 के आरोप से दोषमुक्त कर दिया।
धारा 454 और 411 में तीन माह 10 दिन का कारावास और एक-एक हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया। दोनों सजाएं साथ चलेंगी और जेल में बिताई अवधि सजा में समायोजित होगी।

