रुद्रपुर। 786.73 करोड़ रुपये की मास्टर ड्रेनेज परियोजना को लेकर उठ रहे सवालों के बीच बुधवार को महापौर विकास शर्मा ने दस्तावेजों और पूरी कार्यप्रक्रिया के साथ नगर निगम की भूमिका स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि यह किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि रुद्रपुर को जलभराव से स्थायी राहत दिलाने वाला जनहित का ऐतिहासिक प्रोजेक्ट है, जिसे मंजूरी तक पहुंचाने में नगर निगम ने हर स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाई।
महापौर ने बताया कि 7 फरवरी 2025 को शपथ ग्रहण के महज 15 दिन बाद ही उन्होंने जलभराव की समस्या को प्राथमिकता देते हुए सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ बैठकें शुरू कर दी थीं। 22 फरवरी को नगर निगम सभागार में पहली विस्तृत बैठक हुई, जिसमें परियोजना की कमियों को चिन्हित कर सुधार के सुझाव दिए गए। इसके बाद 3 और 4 मार्च को अधिकारियों के साथ विभिन्न वार्डों का स्थलीय निरीक्षण किया गया। वहीं 19 मार्च को सभी पार्षदों से वार्डवार सुझाव लिए गए और 21-22 मार्च को व्यापक सर्वे कराया गया।
उन्होंने बताया कि प्रारंभिक योजना में 30 प्रमुख नालों का प्रस्ताव था, लेकिन नगर निगम और सिंचाई विभाग के संयुक्त सर्वे के बाद 41 अतिरिक्त नालों को शामिल कराया गया। इससे परियोजना का दायरा बढ़कर लगभग 67 किलोमीटर के ड्रेनेज नेटवर्क तक पहुंच गया और संशोधित डीपीआर शासन को भेजी गई।
महापौर के अनुसार नगर निगम ने एनओसी देते समय शर्त रखी थी कि कार्य की शुरुआत सबसे अधिक जलभराव वाले वार्ड-1 फुलसुंगी से हो। इस सुझाव को स्वीकार करते हुए परियोजना को चार जोन में विभाजित किया गया और प्रथम चरण में 441.79 करोड़ रुपये की लागत से जोन-1 के कार्यों को स्वीकृति मिली।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से कई बार मुलाकात कर परियोजना की पैरवी की गई। मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली व्यय वित्त समिति से 786.73 करोड़ रुपये की डीपीआर स्वीकृत होना इसी सामूहिक प्रयास का परिणाम है। महापौर ने कहा कि उनका उद्देश्य श्रेय लेना नहीं, बल्कि शहर को जलभराव की समस्या से स्थायी मुक्ति दिलाना है। उन्होंने मुख्यमंत्री, जनप्रतिनिधियों, सिंचाई विभाग और नगर निगम के अधिकारियों का भी आभार व्यक्त किया।



