भोजन माताओं ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल किया तहसील परिसर का घेराव।

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भोजन माताओं ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल किया तहसील परिसर का घेराव।

 

– ऊधम सिंह नगर के खटीमा में भोजन माताओं ने अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। तहसील परिसर का घेराव करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
वहीं उनकी मुख्य मांगें और विरोध के कारण,भोजन माताओं ने मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगों पर जोर दिया है:
राज्य कर्मचारी का दर्जा: भोजन माताओं को चतुर्थ श्रेणी का दर्जा देकर राज्य कर्मचारी घोषित किया जाए।
न्यूनतम वेतन: वर्तमान ₹3,000 प्रति माह के मानदेय (लगभग ₹100 प्रतिदिन) को बढ़ाकर ₹26,000 प्रति माह करने की मांग की गई है।भविष्य निधि (PF) और ई०एस०आई० (ESI) की सुविधा प्रदान की जाए।
शासनादेश रद्द करने की मांग: 31 जनवरी 2024 (आदेश संख्या 847/पी०एम० पोषण/2023-24) के उस शासनादेश को तत्काल रद्द करने की मांग की गई है, जिसमें बच्चों की संख्या कम होने पर भोजन माताओं को सेवा से निकालने का प्रावधान है।
अतिरिक्त सुविधाएं: मातृत्व अवकाश, साल में दो बार ड्रेस और जूते, तथा सेवानिवृत्ति के समय ₹5 लाख की आर्थिक सहायता की भी मांग की गई है। भोजन माताओं का आरोप है कि वे पिछले 20-21 वर्षों से सरकारी स्कूलों में भोजन बनाने का कार्य कर रही हैं, लेकिन उन्हें केवल 11 महीने का मानदेय दिया जाता है। खटीमा और प्रदेश के अन्य हिस्सों (जैसे रामनगर, नैनीताल, और पिथौरागढ़) में भी 2 फरवरी 2026 से ही अनिश्चितकालीन हड़ताल और प्रदर्शनों का दौर जारी है।

 

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