निवेश का लालच पड़ा भारी: व्हाट्सऐप ग्रुप के जरिये कारोबारी से 64.72 लाख की साइबर ठगी

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कुमाऊं परिक्षेत्र के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, रुद्रपुर में एक बड़ा साइबर फ्रॉड मामला सामने आया है, जिसमें काशीपुर के गौरव चौधरी नामक युवक से निवेश के नाम पर 64 लाख 72 हजार 518 रुपये ठग लिए गए। पीड़ित ने घटना की विस्तृत तहरीर पुलिस को सौंपकर कार्रवाई की मांग की है।

 

पीड़ित गौरव ने बताया कि 6 अक्टूबर 2025 को उनके मोबाइल नंबर पर एक लिंक भेजकर उन्हें “BULL STOCK CHARGER” नामक व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ लिया गया। ग्रुप में रोजाना शेयर मार्केट से जुड़ी टिप्स और ट्रेंडिंग स्टॉक्स की जानकारी साझा की जाती थी। गौरव खुद स्टॉक मार्केट में निवेश करते थे, इसलिए उन्होंने करीब एक महीने तक ग्रुप की गतिविधियों को खामोशी से देखते हुए उसकी विश्वसनीयता परखने की कोशिश की। इस दौरान ग्रुप में सुझाए गए स्टॉक्स से उन्हें मुनाफा भी हुआ, जिससे उनका विश्वास और बढ़ गया।

 

इसी बीच एक दिन उन्हें व्हाट्सऐप पर +91 89687358030 नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाली ने खुद को इंडिया निवेश इन्वेस्टमेंट ग्रुप की मैनेजर बताते हुए अपना नाम वान्या गिल बताया। उसने दावा किया कि जिस ग्रुप में वह जुड़े हैं, उसके स्टॉक टिप्स जाने-माने मार्केट एक्सपर्ट प्रोफेसर मलय समीर की रिसर्च पर आधारित होते हैं।

 

वान्या गिल लगातार चैट कर गौरव को अपने प्लेटफॉर्म पर निवेश करने के लिए प्रेरित करती रही। उसने आधार कार्ड और पैन कार्ड लेकर कथित तौर पर उनका डिमैट अकाउंट भी खुलवा दिया। शुरुआत में गौरव ने टेस्ट के तौर पर 20 हजार रुपये भेजे और जब वह राशि आसानी से वापस मिल गई, तो उन्होंने इस प्लेटफॉर्म को असली मान लिया।

 

इसके बाद 5 नवंबर 2025 से 26 नवंबर 2025 के बीच गौरव ने अलग-अलग नामों और खातों में कुल आठ लेनदेन कर 64.72 लाख रुपये भेजे। इनमें बाबुलु कुमार रे, एसआर एंटरप्राइजेज, दीक्षित वर्मा, गोल्डन लेजेंड लीजिंग एंड फाइनेंस, विनोद एंटरप्राइजेज और महमूद हसन के खाते शामिल थे।

 

कुछ दिन बाद जब गौरव ने प्लेटफॉर्म में दिख रहा मुनाफा निकालने की कोशिश की तो विदड्रॉल बार-बार फेल होने लगा। उन्होंने वान्या गिल से संपर्क किया तो उसने कॉल उठाना बंद कर दिया और बाद में पीड़ित को ब्लॉक कर दिया। तभी गौरव को समझ आया कि उनके साथ संगठित तरीके से ऑनलाइन धोखाधड़ी की गई है।

 

गौरव चौधरी ने पूरे घटनाक्रम का विवरण, लेनदेन के प्रमाण, मोबाइल नंबर और संबंधित स्क्रीनशॉट साइबर क्राइम पुलिस को सौंपे हैं। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर खाते, मोबाइल नंबर और डिजिटल ट्रेल की जांच शुरू कर दी है।

 

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश से जुड़े ऐसे फर्जी व्हाट्सऐप ग्रुप तेजी से सक्रिय हो रहे हैं, जहां पहले छोटे मुनाफे का झांसा देकर विश्वास जीत लिया जाता है और बाद में भारी रकम ठग ली जाती है।

 

साइबर पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी अज्ञात निवेश प्लेटफॉर्म, लिंक, मैसेज या कॉल के बहकावे में न आएं और किसी भी तरह का पैसा ट्रांसफर करने से पहले उसकी वैधता की जांच अवश्य करें।

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