संवाददाता, सितारगंज।
अंतर्राज्यीय अवैध असलहा तस्करी के मामले में गिरफ्तार आरोपियों को लेकर पुलिस जांच में कई हैरान करने वाले खुलासे हुए हैं। कोतवाल सुंदरम शर्मा के अनुसार, बिरिया फार्म सिसैया निवासी हरेन्द्र सिंह उर्फ हनी और केशवनगर निवासी निखिल उर्फ रानू का आपराधिक सफर अचानक नहीं, बल्कि लालच और संपर्कों के जाल से शुरू हुआ।
पुलिस जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी पहले खनन पट्टों में मजदूरी का काम करते थे। साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले दोनों युवक सीमित आय में जीवन यापन कर रहे थे। इसी दौरान अधिक पैसा कमाने की चाहत ने उन्हें अपराध के रास्ते पर धकेल दिया।
जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि दोनों का संपर्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म यूट्यूब के जरिए जम्मू-कश्मीर के रहने वाले वाहिद-वाजिद उर्फ आतंकी रेहान मीर से हुआ। शुरुआत में आरोपियों ने हथियारों की तस्वीरें भेजकर भरोसा कायम किया और धीरे-धीरे नेटवर्क को मजबूत करते गए। मांग मिलने पर उन्होंने अवैध असलहों की सप्लाई शुरू कर दी।
पुलिस के मुताबिक, गिरोह को विस्तार देने के लिए आरोपियों ने पुलभट्टा क्षेत्र के इन्द्रजीत संधू और पवन संधू से भी संपर्क साधा। इनके माध्यम से हथियारों की उपलब्धता बढ़ी और सप्लाई का दायरा दूसरे राज्यों तक फैल गया।
अधिकारियों का कहना है कि यह गिरोह सुनियोजित तरीके से अंतर्राज्यीय स्तर पर सक्रिय हो चुका था। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और अन्य संभावित आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।




