बांग्लादेश में बड़ा राजनीतिक उलटफेर। ढाका स्थित अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण ने अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के विरुद्ध अपराध का दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई है।
उसी मामले में पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान को भी मौत की सजा दी गई है, जबकि पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून को पाँच साल की सजा मिली। अल-मामून सरकारी गवाह बन गया था और उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया था।
न्यायाधिकरण ने फैसले की लाइव स्ट्रीमिंग की और कहा कि अभियोजन पक्ष ने साबित किया कि जुलाई-अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व वाले विद्रोह पर हुए घातक दमन का आदेश स्वयं हसीना ने दिया था।
78 वर्षीय हसीना पहले से भगोड़ा घोषित थीं और विद्रोह के बाद 5 अगस्त 2024 को भारत भाग गई थीं। इस विद्रोह में करीब 1,400 लोगों की मौत हुई थी।
फैसले से पहले ढाका में सुरक्षा कड़ी की गई। अवामी लीग द्वारा दो दिन के बंद के आह्वान से राजधानी में जनजीवन प्रभावित रहा और कई क्षेत्रों में तनावपूर्ण माहौल बना रहा।
हसीना सरकार ने ही 1971 के युद्ध अपराधों की सुनवाई के लिए इस न्यायाधिकरण की स्थापना की थी, जो अब उन्हीं के खिलाफ ऐतिहासिक फैसला सुना रहा है।




