रुद्रपुर में नजूल भूमि पर वर्षों से रह रहे 30 हजार से अधिक परिवारों को आखिरकार बड़ी राहत मिली है। जिला प्रशासन ने बिजली कनेक्शन पर लगी रोक हटाने का आदेश जारी कर दिया है। 2023 में रोक लगने के बाद से इन परिवारों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। प्राधिकरण के आदेश के बाद बिजली विभाग ने कनेक्शन देना बंद कर दिया था, जिससे लोगों में गहरा आक्रोश पैदा हो गया था।
लेकिन अब राहत आदेश जारी होने के साथ ही राजनीतिक तापमान भी चढ़ गया है। असली श्रेय किसे दिया जाए—मौजूदा विधायक शिव अरोरा को या पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल को—इसी पर सियासी तकरार तेज हो गई है।
बीते सप्ताह विधायक शिव अरोरा ने डीवीए कार्यालय में पहुंचकर अधिकारियों से सख्ती से बात की थी। उन्होंने लोगों की परेशानियों का हवाला देते हुए बिजली विभाग को फटकार लगाई और जिलाधिकारी से मुलाकात कर सोमवार को समाधान का भरोसा दिया। निर्धारित समय से पहले ही बैठक के बाद रोक हटाने का निर्णय जारी कर दिया गया।
वहीं दूसरी ओर, पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल भी पीछे नहीं। उन्होंने देहरादून में मुख्य सचिव से मुलाकात कर रुद्रपुर की जमीन को तीन श्रेणियों में बांटने के कारण पैदा हुई समस्याओं को रखा। ठुकराल का दावा है कि मुख्य सचिव ने उनकी बात सुनकर तुरंत जिलाधिकारी को निर्देश दिए, जिसके बाद ही राहत आदेश जारी हुआ।
दोनों नेता इसे अपनी-अपनी मेहनत का नतीजा बता रहे हैं। अब यह मुद्दा पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। सवाल वही—असली श्रेय किसे?
जनता की अदालत इसका फैसला 2027 में नहीं, बल्कि 2026 के विधानसभा चुनाव में सुनाएगी। फिलहाल, परिवारों के घरों तक बिजली पहुंचने की उम्मीद ने राहत तो दे दी है, लेकिन सियासी जंग अभी जारी है।




