संसद में साइबर अपराध पर बड़ा खुलासा: 24.65 लाख शिकायतें, 8690 करोड़ बचाए, केंद्र का सख्त एक्शन—I4C, 1930 हेल्पलाइन और जागरूकता अभियान से अपराधियों पर शिकंजा

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संसद में उठा साइबर अपराध का मुद्दा, केंद्र सरकार ने गिनाए ठोस कदम

नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री व नैनीताल-उधम सिंह नगर से सांसद अजय भट्ट द्वारा संसद में पूछे गए अतारांकित प्रश्न के जवाब में केंद्र सरकार ने देश में बढ़ते साइबर अपराधों पर विस्तृत जानकारी देते हुए उनसे निपटने के लिए किए जा रहे उपायों को सामने रखा है।

गृह मंत्रालय के राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने बताया कि बीते वर्षों में साइबर अपराधों से निपटने के लिए मजबूत कानूनी प्रावधान मौजूद हैं, जिनमें सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, भारतीय न्याय संहिता, 2023 और पोक्सो अधिनियम, 2012 शामिल हैं।

सरकार ने साइबर अपराधों से प्रभावी तरीके से मुकाबला करने के लिए ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ (I4C) की स्थापना की है। इसके तहत ‘राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल’ (NCRP) शुरू किया गया, जहां आम नागरिक ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

वित्तीय साइबर धोखाधड़ी पर नियंत्रण के लिए 2021 में ‘नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग एवं प्रबंधन प्रणाली’ (CFCFRMS) शुरू की गई। मंत्रालय के अनुसार 31 जनवरी 2026 तक 24.65 लाख से अधिक शिकायतों में 8,690 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि बचाई जा चुकी है। साथ ही, त्वरित सहायता के लिए 1930 हेल्पलाइन नंबर भी संचालित किया जा रहा है।

केंद्र सरकार ने 2 जनवरी 2026 को एक नई एसओपी जारी कर साइबर शिकायतों के निपटान को अधिक प्रभावी और पीड़ित-केंद्रित बनाया है।

साइबर जागरूकता बढ़ाने के लिए भी व्यापक अभियान चलाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम से लेकर कॉलर ट्यून, सोशल मीडिया, टीवी-रेडियो, स्कूलों और सार्वजनिक स्थलों पर प्रचार किया जा रहा है। ‘साइबर अलर्ट’ जैसे कार्यक्रमों के जरिए लोगों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

सरकार का दावा है कि इन समन्वित प्रयासों से साइबर अपराधों पर नियंत्रण और नागरिकों की सुरक्षा को मजबूत किया जा रहा है।

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