विधायक अरविंद पांडेय का अफसरों पर हमला: रजिस्ट्री में ‘सुविधा शुल्क’ से सरकार बदनाम, डीएम से मुलाकात कर खोला मोर्चा, बोले—भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं, चुनावी आरोपों पर भी पलटवार

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उत्तराखंड की सियासत में एक बार फिर बयानबाज़ी तेज हो गई है। गदरपुर से भाजपा विधायक अरविंद पांडेय ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए भ्रष्ट अधिकारियों पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सरकार ईमानदारी से काम कर रही है, लेकिन कुछ अधिकारी सुविधा शुल्क लेकर सरकार की छवि खराब कर रहे हैं।

बृहस्पतिवार को विधायक पांडेय जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया से उनके आवास पर मिले। मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में पांडेय ने कहा कि एक एकड़ जमीन की रजिस्ट्री के लिए पांच से सात लाख रुपये तक मांगे जाने की शिकायतें मिल रही हैं। हालांकि उन्होंने माना कि उनके पास प्रत्यक्ष सबूत नहीं हैं, लेकिन ऐसी बातें लगातार सुनने में आ रही हैं।

उन्होंने कहा कि जिले की कई तहसीलों में जमीनों की रजिस्ट्री लंबे समय से बंद है, जिससे प्रॉपर्टी कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ब्याज पर पैसा लेकर जमीन खरीदने वाले डीलरों की हालत खराब है और कई लोग तनाव में हैं। विधायक ने कहा कि विकास प्राधिकरण और रेरा के नियम लागू हों, लेकिन सुविधा शुल्क लेकर काम करना गलत है।

डीएम ने आश्वासन दिया है कि 18 फरवरी के बाद सभी तहसीलों में एसडीएम और पटवारियों की बैठक बुलाई जाएगी और कैंप लगाकर रजिस्ट्री प्रक्रिया को सुचारु किया जाएगा।

वहीं युवक कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सुमित्तर भुल्लर द्वारा उनके बेटे पर लगाए गए जमीन कब्जाने के आरोपों पर पांडेय ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि चुनावी वर्ष में इस तरह के आरोप लगते रहते हैं। यदि उन्होंने कोई बड़ा अपराध किया है तो विरोधी कानून का सहारा लें।

विधायक के बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर रजिस्ट्री और भ्रष्टाचार का मुद्दा गरमा गया है।

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