उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले में एक दर्दनाक हादसे ने सभी को झकझोर दिया। बिजली लाइन में फॉल्ट सुधारते वक्त एक लाइनमैन की करंट लगने से मौके पर ही मौत हो गई। सबसे हैरानी की बात ये रही कि हादसे के वक्त आसपास मौजूद लोग मदद करने की बजाय भाग गए। पीड़ित का बेटा पिता को गोद में लिए रोता रहा, लेकिन कोई आगे नहीं आया।
घटना शिमला पिस्तौर क्षेत्र की है, जहां सत्या मेंटल इंडस्ट्रीज में बिजली फॉल्ट आने पर लाइनमैन शिव कुमार को बुलाया गया था। उन्होंने शटडाउन लेने के बाद जैसे ही फॉल्ट सुधारना शुरू किया, उन्हें करंट लग गया। करंट लगते ही वो ऊपर से नीचे गिर पड़े और सिर पर गंभीर चोट लगी।
इस हादसे के बाद उनका बेटा नरेश मौके पर मौजूद था। वह उन्हें गोद में लेकर मदद के लिए चिल्लाता रहा, लेकिन घटनास्थल पर मौजूद कंपनी के इलेक्ट्रीशियन, कर्मचारी और दो सुरक्षा गार्ड उसे वहीं छोड़कर भाग खड़े हुए।
(नरेश, मृतक शिव कुमार का बेटा):
मेरे पापा मेरी गोद में तड़पते रहे, मैंने रो-रोकर सबको बुलाया लेकिन किसी ने मदद नहीं की। करीब 20 मिनट बाद उन्होंने मेरी गोद में ही दम तोड़ दिया।
नरेश ने बताया कि उसने तत्काल जेई को फोन कर जानकारी दी, लेकिन वह डेढ़ घंटे बाद मौके पर पहुंचे। नरेश का आरोप है कि उसके पिता दो दशकों से विभाग में ईमानदारी से काम कर रहे थे, लेकिन हादसे के वक्त विभाग और कंपनी दोनों ने संवेदनहीनता दिखाई।
(सतेंद्र जोगियाल, जेई, ऊर्जा निगम, लालपुर):
लाइनमैन शिव कुमार ने शटडाउन लालपुर की जगह गलती से कुरैया से लिया था, जबकि लाइन में बिजली चालू थी। इसी वजह से करंट लगने से हादसा हुआ।
एक तरफ विभागीय लापरवाही और दूसरी तरफ इंसानियत की कमी ने एक समर्पित कर्मचारी की जान ले ली। अब सवाल यह उठता है कि इस हादसे के लिए कौन जिम्मेदार है? क्या विभाग कोई जवाबदेही लेगा? और क्या भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे?