“यह गुरुद्वारा सिख समुदाय के लिए न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह उनके इतिहास और संस्कृति का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसके अलावा यह गुरुद्वारा उन लोगों के लिए भी विशेष है, जो सिख इतिहास और संस्कृति के प्रति रुचि रखते हैं. यहां जो सच्चे मन से गुरु साहब से मन्नत मांगता है. उसकी अरदास जरूर पूरी होती है..”
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है. यहां पर आज भी गुरु गोविंद सिंह जी के द्वारा भेजी गई श्री गुरु ग्रंथ साहिब मौजूद हैं, जिस पर गुरु गोविंद सिंह जी के हस्ताक्षर है. इसके अलावा उनके द्वारा लिखे गये दो हुकमनामे भी संरक्षित हैं।
इस गुरुद्वारा में सिखों के नौवें गुरु तेग बहादुर जी महाराज 1670 में आए थे और महाराज तीन दिन इसी स्थान पर रुके थे. जबकि सिख धर्म के प्रचारक चंद्रचूड़ और बोझड़ ने लखनऊ में सिख धर्म का प्रचार प्रसार इसी जगह से शुरू किया था. इन्हें सिखों के छठे गुरु, हरगोविंद सिंह जी महाराज ने यहां भेजा था।
गुरुद्वारे के ज्ञानी, जगजीत सिंह ने बताया कि इस गुरुद्वारे में गुरु गोविंद सिंह जी द्वारा भेजे गए दो हुक्मनामे और एक हस्तलिखित गुरु ग्रंथ साहिब संरक्षित है. पहला हुकुमनामा 1693 ई में आया था, जो कि गुरु गोविंद सिंह द्वारा लिखित था. जिसमें उन्होंने 5 तोला सोना और कमाई का 10 प्रतिशत हिस्सा मंगवाने का आदेश दिया था. यह आदेश सिख समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण निर्देश था. जिससे उन्हें अपनी संपत्ति और संसाधनों का सही उपयोग करने की दिशा।
दूसरा हुकुमनामा 1701 ई. में लिखा गया था. जिसमें गुरु गोविंद सिंह ने तोप के कारीगर को बुलाने का आदेश दिया था. इस समय मुग़ल साम्राज्य के साथ युद्ध की शुरुआत हो चुकी थी. इस हुकुमनामे के माध्यम से गुरु गोविंद सिंह ने सिख समुदाय को युद्ध के लिए तैयार करने का आदेश दिया था।
गुरु गोविंद सिंह जी महाराज 1672 में इस गुरुद्वारे में लगभग दो महीने तक ठहरे थे. जबकि वर्ष 1686 में गुरु गोविंद सिंह जी ने हस्तलिखित श्री गुरु ग्रंथ साहिब का एक स्वरूप भेजा था, जिसे उनके शिष्यों ने लिखा था. इस पावन ग्रंथ पर गुरु गोविंद सिंह जी के हस्ताक्षर आज भी देखे जा सकते हैं।
यह गुरुद्वारा सिख समुदाय के लिए न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह उनके इतिहास और संस्कृति का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसके अलावा यह गुरुद्वारा उन लोगों के लिए भी विशेष है, जो सिख इतिहास और संस्कृति के प्रति रुचि रखते हैं. यहां जो सच्चे मन से गुरु साहब से मन्नत मांगता है. उसकी अरदास जरूर पूरी होती है।




