राजधानी देहरादून के सनसनीखेज रेसकोर्स हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। नेहरू कॉलोनी थाना पुलिस ने फरार चल रहे तीनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। हत्या के बाद शव को चिड़ियापुर के जंगल में ठिकाने लगाया गया था।
मामले की शुरुआत 11 फरवरी को हुई, जब शास्त्री नगर, बसंत विहार निवासी संतराम धीमान ने अपने 28 वर्षीय बेटे दिगंबर धीमान की गुमशुदगी दर्ज कराई। जांच में सामने आया कि 9 फरवरी को कोर्ट में पेशी के बाद दिगंबर घर नहीं लौटा। पुलिस को यह भी पता चला कि उसके करीबी साथी भी उसी दिन से गायब थे।
तफ्तीश के दौरान एक संदिग्ध टैक्सी की जानकारी मिली। 17 फरवरी को पुलिस ने टैक्सी चालक राज नंदन को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पूछताछ में खुलासा हुआ कि 9 फरवरी की रात हेमंत सेमवाल, आदिल और संजू ने दिगंबर के शव को कंबल में लपेटकर चिड़ियापुर के जंगल में फेंक दिया था। चालक की निशानदेही पर जंगल से शव बरामद कर उसकी पहचान दिगंबर के रूप में की गई।
मृतक के पिता की तहरीर पर हेमंत सेमवाल, आदिल और संजू के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस टीमों का गठन कर आरोपियों की तलाश शुरू की गई। शनिवार 21 फरवरी को तीनों आरोपियों को आईएसबीटी के पास हरिद्वार बाईपास रोड से गिरफ्तार कर लिया गया। उनकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त लोहे की रॉड, हथौड़ा, पेचकस और मृतक के जूते नेपाली फार्म के पास बरामद किए गए।
बाइट – प्रमेंद्र डोबाल, एसएसपी देहरादून:
एसएसपी ने बताया कि आरोपियों और दिगंबर के बीच करीब ढाई लाख रुपये के लेन-देन को लेकर विवाद था। 9 फरवरी को हेमंत ने दिगंबर को रेसकोर्स स्थित अपने घर बुलाया, जहां नशे के दौरान पैसों को लेकर विवाद बढ़ गया। आरोपियों ने लोहे की रॉड और हथौड़े से हमला कर दिया, जिससे अधिक रक्तस्राव के कारण उसकी मौत हो गई।
घटना के बाद आरोपियों ने टैक्सी चालक को 15 हजार रुपये देने का लालच देकर शव ठिकाने लगाने में मदद ली। शव को चिड़ियापुर के जंगल में नहर किनारे रेत में दबा दिया गया।
फिलहाल पुलिस ने तीनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में एक अन्य आरोपी पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस का कहना है कि इस हत्याकांड में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।




