अंगीठी का धुआं बना काल, CISF कॉलोनी में 4 साल की मासूम की मौत, मां गंभीर, बंद कमरे में अंगीठी जलाना पड़ा जानलेवा

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टिहरी गढ़वाल।

उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां ठंड से बचने के लिए घर के अंदर जलाई गई अंगीठी का धुआं एक मासूम की जान ले गया। नई टिहरी स्थित सीआईएसएफ (CISF) कॉलोनी में अंगीठी के धुएं से दम घुटने के कारण 4 साल की बच्ची की मौत हो गई, जबकि उसकी मां की हालत गंभीर बनी हुई है।

पुलिस के अनुसार, यह घटना शनिवार सुबह की है। सीआईएसएफ सिपाही गणेश पालवे के आवास का दरवाजा काफी देर तक नहीं खुला, जिस पर आसपास के लोगों ने आवाज लगाई, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद मामले की सूचना पुलिस को दी गई। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची और दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया।

अंदर का दृश्य बेहद हृदयविदारक था। पुलिस ने देखा कि बिस्तर पर सिपाही गणेश पालवे की 4 वर्षीय बेटी आर्या और उनकी 37 वर्षीय पत्नी मोनिका बेहोशी की हालत में पड़ी थीं। पुलिस टीम ने तुरंत दोनों को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने मासूम आर्या को मृत घोषित कर दिया।

वहीं, मोनिका की हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उन्हें हायर सेंटर एम्स ऋषिकेश रेफ कर दिया। बताया जा रहा है कि घटना के समय सीआईएसएफ सिपाही गणेश पालवे घर पर मौजूद नहीं थे। वह अस्वस्थ होने के चलते पहले से ही इलाज के लिए देहरादून गए हुए थे।

पुलिस ने बताया कि कमरे की तलाशी के दौरान कोई विषाक्त पदार्थ या सुसाइड नोट नहीं मिला। कमरे में केवल अंगीठी रखी हुई थी, जिससे अंदेशा जताया जा रहा है कि बंद कमरे में अंगीठी जलने से कार्बन मोनो ऑक्साइड गैस भर गई और दम घुटने से यह हादसा हुआ। हालांकि, मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।

गौरतलब है कि उत्तराखंड में इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है। टिहरी गढ़वाल में तापमान न्यूनतम 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। ठंड से बचाव के लिए लोग अंगीठी का सहारा ले रहे हैं, लेकिन बंद कमरे में इसका उपयोग कई बार जानलेवा साबित हो जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, लकड़ी और पत्थर के कोयले जलाने से निकलने वाली कार्बन मोनो ऑक्साइड गैस रंगहीन और गंधहीन होती है, जो बंद कमरे में तेजी से फैलकर जानलेवा बन जाती है। पहले भी उत्तराखंड में अंगीठी के धुएं से मौत की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

अंगीठी के धुएं से कैसे बचें:

ठंड के मौसम में अंगीठी जलाते समय दरवाजे और खिड़कियां खुली रखें।

कभी भी बंद कमरे में अंगीठी जलाकर न रखें।

जलती अंगीठी कमरे में रखकर न सोएं।

सोने से पहले अंगीठी को बाहर रख दें, ताकि कार्बन मोनो ऑक्साइड गैस कमरे में जमा न हो।

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