बहुचर्चित एनएच-74 घोटाला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के देहरादून उपक्षेत्रीय कार्यालय ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए चार किसानों की लगभग 13.89 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) के तहत की गई है।
मामले की शुरुआत 10 मार्च 2017 को हुई थी, जब तत्कालीन एडीएम प्रताप शाह ने पंतनगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। जांच में सामने आया कि किसान दिलबाग सिंह, जरनैल सिंह, बलजीत कौर और दलविंदर सिंह ने कथित रूप से राजस्व अधिकारियों और बिचौलियों की मिलीभगत से भूमि अभिलेखों में हेरफेर किया। आरोप है कि उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1950 की धारा 143 के आदेश बैक डेट में कराए गए, ताकि एनएच-74 चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित भूमि पर गैर-कृषि दर से अधिक मुआवजा प्राप्त किया जा सके।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने करीब 26 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त मुआवजा लिया। इस घोटाले में सात पीसीएस अधिकारियों समेत एक दर्जन से अधिक अधिकारी-कर्मचारी निलंबित हुए थे, जबकि 30 से ज्यादा सरकारी कर्मियों, दलालों और किसानों को जेल भेजा गया था।
ईडी की जांच में पाया गया कि अवैध रूप से प्राप्त धनराशि का इस्तेमाल अचल संपत्तियां खरीदने, विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर करने और रिश्तेदारों के खातों में राशि स्थानांतरित करने में किया गया। इन्हीं तथ्यों के आधार पर ईडी ने बुधवार को 13.89 करोड़ रुपये की संपत्तियों को कुर्क करने का अंतरिम आदेश जारी किया।
ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले में आगे की जांच जारी है और अवैध संपत्तियों की पहचान होने पर अतिरिक्त कार्रवाई भी की जाएगी।


