रुद्रपुर। अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई के दौरान तहसील प्रशासन की टीम पर हुए हमले के मामले में पुलिस की ढिलाई अब सवालों के घेरे में है। घटना की पूरी वीडियोग्राफी उपलब्ध होने और हमलावरों के चेहरे साफ नजर आने के बावजूद कई दिन बीत जाने के बाद भी किसी आरोपी की गिरफ्तारी न होना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है।
मामला 31 दिसंबर का है, जब अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए तहसीलदार हिमांशु जोशी के निर्देश पर राजस्व टीम क्षेत्र में गश्त कर रही थी। सुबह करीब साढ़े आठ बजे ग्राम निर्मलनगर में राजस्व उपनिरीक्षक त्रिलोचन सुयाल और पंकज चंद ने अवैध मिट्टी का परिवहन कर रहे एक महिंद्रा ट्रैक्टर-ट्राली को रोका। जांच के दौरान चालक कोई वैध खनन अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर सका, जबकि वाहन पर नंबर प्लेट भी नहीं लगी थी। इसके बाद ट्रैक्टर-ट्राली को सीज कर तहसील लाया जा रहा था।
आरोप है कि इसी दौरान रास्ते में 10 से 15 अज्ञात लोगों ने राजस्व टीम पर अचानक हमला कर दिया और बलपूर्वक ट्रैक्टर-ट्राली छुड़ा ले गए। दबंगों ने ट्राली में भरी अवैध मिट्टी को सड़क पर बिखेर दिया और वाहन लेकर फरार हो गए। पूरी घटना कैमरे में कैद हुई है, जिसमें हमलावरों के चेहरे स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं।
तहसीलदार हिमांशु जोशी ने इस घटना को राजकीय कार्य में गंभीर बाधा बताते हुए कोतवाली में अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मुकदमा दर्ज तो किया, लेकिन अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। स्थानीय लोगों और प्रशासनिक हलकों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि जब पहचान के लिए वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं, तो कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है।
शक्तिफार्म चौकी प्रभारी प्रकाश भट्ट का कहना है कि वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपितों की पहचान की जा रही है और जल्द ही आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, अब तक ठोस कार्रवाई न होने से खनन माफिया के हौसले बुलंद होने और प्रशासनिक अमले की सुरक्षा पर सवाल उठने लगे हैं।




