देहरादून/रामनगर, संवाददाता।
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दौरे के दौरान हुई सुरक्षा में गंभीर चूक का मामला अब भी सुर्खियों में है। जांच पूरी हो चुकी है और वन विभाग ने तीन कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है, लेकिन सवाल अब भी कायम है — ऊंचे पदों पर बैठे अधिकारियों की जवाबदेही आखिर कब तय होगी?
क्या है मामला?
हाल ही में सीएम धामी रामनगर स्थित कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के दौरे पर थे। इस दौरान वन विभाग की जिस गाड़ी में उन्हें घुमाया गया, उसका फिटनेस दो साल पहले ही खत्म हो चुका था। यह साफ तौर पर सुरक्षा मानकों और नियमों का उल्लंघन था। पहले चरण में वाहन चालक उमर को निलंबित किया गया था। अब जांच रिपोर्ट के आधार पर तीन और कर्मचारियों —
वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी प्रशासनिक अधिकारी, प्रधान सहायक को निलंबित कर दिया गया है।
जांच रिपोर्ट और सवालों के घेरे में अफसरशाही
मुख्यमंत्री की सुरक्षा में इस लापरवाही के बाद प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) ने मामले की जांच के आदेश दिए थे। यह जांच पीसीसीएफ (वाइल्डलाइफ) रंजन कुमार मिश्रा को सौंपी गई थी।
रिपोर्ट में यह तो स्पष्ट हो गया कि नियमों की अनदेखी हुई, लेकिन किस स्तर पर गलती हुई, यह अब भी एक अधूरा सवाल है। रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद की गई कार्रवाई में उच्च स्तर के किसी भी अधिकारी को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया, जिससे प्रशासनिक कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। यही हाल राजाजी टाइगर रिजर्व में हुई वाहन दुर्घटना का भी है, जहां 6 कर्मचारियों की मौत के बावजूद किसी बड़े अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी स्वयं इस पूरे घटनाक्रम को लेकर नाराजगी जता चुके हैं और सख्त रुख अपनाने की बात कह चुके हैं।




