धर्मनगरी हरिद्वार से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने समाज की संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। भागदौड़ भरी जिंदगी और रोजगार की तलाश में परिवारों के बिखराव के बीच एक बुजुर्ग मां की अकेलेपन में हुई मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला हरिद्वार के ज्वालापुर कोतवाली क्षेत्र की आर्यनगर कॉलोनी का है। यहां 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला का शव उनके पुश्तैनी मकान से बरामद हुआ। बताया जा रहा है कि महिला घर में अकेली रह रही थीं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, उनकी मौत करीब 10 से 15 दिन पहले हो चुकी थी। शव से दुर्गंध आने पर पड़ोसियों को भी आशंका हुई, लेकिन असलियत तब सामने आई जब उनका बेटा नोएडा से हरिद्वार पहुंचा।
दरअसल, महिला के दोनों बेटे उत्तराखंड से बाहर रहते हैं। एक बेटा फरीदाबाद में बैंक ऑफ इंडिया में कार्यरत है, जबकि दूसरा दिल्ली में अपने परिवार के साथ रह रहा है और आईबी से वीआरएस ले चुका है। बताया जा रहा है कि बेटों का मां से नियमित फोन पर संपर्क रहता था, लेकिन पिछले कई दिनों से महिला फोन रिसीव नहीं कर रही थीं। लगातार कॉल का जवाब न मिलने पर एक बेटा नोएडा से हरिद्वार पहुंचा।
घर पहुंचकर बेटे ने दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद आसपास के लोगों की मदद से दरवाजा तोड़ा गया। दरवाजा खुलते ही अंदर का दृश्य देखकर सभी सन्न रह गए। बुजुर्ग महिला का शव घर के भीतर पड़ा था। देखने से प्रतीत हो रहा था कि उनकी मौत कई दिन पहले हो चुकी थी।
सूचना मिलते ही ज्वालापुर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है। आसपास के लोगों और परिजनों से भी पूछताछ की जा रही है।
ज्वालापुर कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह राणा के अनुसार, महिला की मौत लगभग 10 से 15 दिन पहले हुई प्रतीत होती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा। फिलहाल पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है।
यह घटना सिर्फ एक मौत की खबर नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक ढांचे और अकेले पड़ते बुजुर्गों की हकीकत को भी उजागर करती है। सवाल यह है कि आखिर बुजुर्गों की देखभाल और सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?




