केनरा बैंक से 75 लाख की सुनियोजित धोखाधड़ी, फर्जी जीएसटी बिल और परिजनों के खातों में ट्रांसफर का आरोप
रुद्रपुर। केनरा बैंक की एसएमई शाखा भदईपुरा, रुद्रपुर में वर्ष 2020 में स्वीकृत किए गए व्यावसायिक ऋण के दुरुपयोग और करीब 75 लाख रुपये की सुनियोजित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। इस संबंध में केनरा बैंक के शाखा प्रबंधक सत्येन्द्र प्रताप सिंह ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, रुद्रपुर के न्यायालय में धारा 156(3) दण्ड प्रक्रिया संहिता के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल कर थाना रुद्रपुर पुलिस को एफआईआर दर्ज कर जांच के आदेश देने की मांग की है।
प्रार्थना पत्र के अनुसार, अभियुक्त रविन्द्र सिंह नेगी पुत्र गोपाल सिंह नेगी, प्रोपराइटर मैसर्स सिद्धि विनायक इंटरप्राइजेज, निवासी ग्राम चुकटी किशनपुर, थाना किच्छा, ने अपने व्यवसाय के विस्तार के नाम पर केनरा बैंक से एमएसएमई योजना के अंतर्गत ऋण के लिए आवेदन किया था। बैंक द्वारा 27 जनवरी 2020 को उसकी फर्म के पक्ष में 45 लाख रुपये की सीसी लिमिट स्वीकृत की गई। इसके अतिरिक्त मशीनरी क्रय के लिए 3 फरवरी 2020 को 30 लाख रुपये का टर्म लोन भी स्वीकृत किया गया। दोनों ऋण खातों से कुल 75 लाख रुपये की धनराशि निर्धारित औपचारिकताओं के बाद फर्म के खाते में जारी कर दी गई।
आरोप है कि अभियुक्त द्वारा ऋण की शर्तों के अनुरूप न तो पर्याप्त स्टॉक रखा गया और न ही मशीनरी खरीदी गई। समय पर ऋण की अदायगी न होने पर जब बैंक अधिकारियों को संदेह हुआ और जांच कराई गई, तो पाया गया कि सीसी लिमिट के अंतर्गत दिखाई गई धनराशि का कोई वास्तविक स्टॉक मौजूद नहीं है। वहीं मशीनरी खरीद के लिए लिए गए टर्म लोन की राशि भी निर्धारित उद्देश्य में खर्च नहीं की गई।
बैंक की जांच में यह भी सामने आया कि अभियुक्त ने ऋण की राशि को अपनी बहन कंचन सिंह, बहनोई शिवकुमार सिंह और उसके भाई पवन कुमार सिंह के साथ मिलकर सुनियोजित षड्यंत्र के तहत अलग-अलग खातों और फर्मों में ट्रांसफर कर दिया। आरोप है कि करीब 13.25 लाख रुपये एक अन्य फर्म के खाते में, लगभग 30 लाख रुपये मैसर्स एसआरएल कॉरपोरेशन, करीब 4 लाख रुपये व्यक्तिगत खाते में और लगभग 11.50 लाख रुपये एसआरएल ट्रेडर्स के खाते में स्थानांतरित कर धोखाधड़ी से हड़प लिए गए।
बैंक को मशीनरी खरीद का प्रमाण देने के लिए अभियुक्त द्वारा एक जीएसटी बिल प्रस्तुत किया गया, जिसकी ऑनलाइन जांच में उसे फर्जी और कूटरचित पाया गया। जांच में यह भी सामने आया कि जिस कंपनी के नाम से बिल दिखाया गया, उसे भुगतान नहीं किया गया था और संबंधित जीएसटी विवरण संदिग्ध थे। वर्तमान में दोनों ऋण खातों में बैंक का बकाया 74 लाख रुपये से अधिक बताया गया है।
मामले की जानकारी मिलने पर बैंक ने अपने उच्चाधिकारियों को सूचित किया, जहां से वैधानिक कार्रवाई के निर्देश मिले। बैंक प्रबंधन द्वारा थाना रुद्रपुर में कई बार तहरीर देने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई, जिसके चलते अब न्यायालय की शरण ली गई है। प्रार्थना पत्र में अभियुक्तों के विरुद्ध आईपीसी की धारा 420, 406, 467, 468, 471 और 120बी के तहत मामला दर्ज कर विस्तृत जांच की मांग की गई है।




