रुद्रपुर। निप्पॉन लाइफ इंडिया एसेट मैनेजमेंट लिमिटेड (निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड) ने अपने ही हल्द्वानी शाखा के कर्मचारियों और सहयोगियों के खिलाफ करीब ₹93.85 लाख की म्यूचुअल फंड धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया है। कंपनी ने साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, रुद्रपुर में विस्तृत तहरीर देकर गंभीर आपराधिक धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है।
निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड (NIMF) की ओर से अधिकृत अधिकारी सचित मेहरा द्वारा दी गई शिकायत के अनुसार, हल्द्वानी शाखा में पदस्थ कर्मचारियों ने पहचान छुपाकर, फर्जी दस्तावेज तैयार कर और निवेशकों के रिकॉर्ड में हेरफेर कर करोड़ों रुपये की वित्तीय धोखाधड़ी को अंजाम दिया।
कंपनी ने अपनी तहरीर में बताया कि मुख्य आरोपी गौरव कुमार गर्ग, ब्रांच ऑपरेशन्स एग्जीक्यूटिव, ने साथी कर्मचारियों योगेश वरुण (रिलेशनशिप मैनेजर) और विनोद प्रकाश (ब्रांच मैनेजर) के साथ मिलकर निष्क्रिय निवेशक खातों में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पैन, ईमेल, मोबाइल और बैंक खाते बदले। इसके बाद तीन अलग-अलग निवेशकों — योगेश जयंतिलाल सूरा, रुकमणि अटलराय केसवानी, और ओमप्रकाश — के फोलियो से फर्जी रिडेम्पशन कर लगभग ₹93.85 लाख की राशि निकाल ली गई।
शिकायत के अनुसार, आरोपी गौरव गर्ग ने धोखाधड़ी से प्राप्त ₹80 लाख की राशि अपने नियंत्रण वाले एसबीआई खाते में ट्रांसफर की, जिसके बाद रकम का बड़ा हिस्सा कल्याण ज्वेलर्स, जीएन पाल एंड एसोसिएट्स, ग्रैंड ज्वेल्स LLP जैसे ज्वेलरी प्रतिष्ठानों में भेजा गया। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी ने एटीएम कार्ड और ओटीपी के जरिए अनधिकृत निकासी कीं और कुछ सहयोगियों को नकद भुगतान भी किया।
कंपनी की आंतरिक जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी कर्मचारियों ने न केवल निवेशकों की निजी जानकारी में छेड़छाड़ की, बल्कि सिस्टम एक्सेस और डिजिटल हस्ताक्षरों का दुरुपयोग कर कई जाली हलफनामे और बैंक घोषणाएं तैयार कीं।
निप्पॉन इंडिया एएमसी ने पुलिस से भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराएँ 318(4), 319, 336, 339, 316 और 61, तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धाराएँ 66, 66C और 66D के तहत मामला दर्ज करने की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि यह अपराध न केवल वित्तीय धोखाधड़ी है, बल्कि निवेशकों के विश्वास और डेटा सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन भी है।
तहरीर में यह भी उल्लेख किया गया है कि आरोपी गौरव गर्ग ने अपने मित्र मोहित तोमर, रुकमणि, पंकज गर्ग और ओमप्रकाश गुप्ता के साथ मिलकर पहचान छुपाने और फर्जी निवेशक प्रोफाइल तैयार करने में भूमिका निभाई। कंपनी ने सभी आरोपियों की संलिप्तता की विस्तृत जांच, बैंक खातों को फ्रीज़ करने और अपराध से अर्जित धन को जब्त करने की मांग की है।



