बिलों के भुगतान में देरी पर DDO की जवाबदेही तय, सात हजार रुपये देने का आदेश, मां के इलाज के लिए स्वीकृत 73 हजार रुपये पाने को भटकती रही बेटी, आयोग ने सेवा में कमी माना

रुद्रपुर। चिकित्सा प्रतिपूर्ति के बिलों के भुगतान में देरी और दस्तावेज सही तरीके से अपलोड नहीं करने पर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने जिला विकास अधिकारी (डीडीओ), ऊधमसिंह नगर की जवाबदेही तय की है। आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए परिवादिनी को पांच हजार रुपये क्षतिपूर्ति और दो हजार रुपये वाद व्यय देने का आदेश दिया है। कुल सात हजार रुपये की यह धनराशि 45 दिन के भीतर अदा करनी होगी।

 

रुद्रपुर निवासी अधिवक्ता हेमलता पांडे ने अपनी मां के इलाज की प्रतिपूर्ति राशि के भुगतान में देरी को लेकर आयोग में परिवाद दायर किया था। उनके पिता विकास भवन में वरिष्ठ स्थापना सहायक के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी मृत्यु के बाद मां तुलसी पांडे को पारिवारिक पेंशन मिलती थी। वर्ष 2022 में हृदय रोग के उपचार पर मेडिसिटी और कृष्णा अस्पताल में कुल 1,79,181 रुपये खर्च हुए थे। इसमें से 73,078 रुपये की प्रतिपूर्ति स्वीकृत हो गई थी।

 

इसके बावजूद राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के पोर्टल पर दस्तावेज पठनीय नहीं होने की टिप्पणी दर्ज हुई। आयोग के अनुसार, डीडीओ कार्यालय की ओर से दस्तावेज सही तरीके से अपलोड नहीं किए गए। फरवरी 2023 में मां की मृत्यु के बाद पेंशन रिकॉर्ड और आईएफएमएस खाता बंद हो गया। इसके चलते भुगतान का मामला अटका रहा।

 

परिवाद दायर होने के बाद विभाग ने छह मई 2025 को मूल प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान कर दिया। हालांकि, आयोग ने माना कि बाद में भुगतान करने से पहले हुई लापरवाही और उससे हुई परेशानी की भरपाई की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होती।

 

आयोग के अध्यक्ष राजीव कुमार खरे, सदस्य नवीन चन्द्र चन्दोला और सदस्या डॉ. मनीला की पीठ ने डीडीओ को क्षतिपूर्ति और वाद व्यय देने का आदेश दिया। वहीं, राज्य स्वास्थ्य प्राधिकरण के खिलाफ परिवाद निरस्त कर दिया गया।