साइबर ठगों की कमर तोड़ने उतरी उत्तराखंड पुलिस, 820 संदिग्ध खातों से खुला राज, 159 मुकदमे, 644 सिम और 630 मोबाइल पहचान संख्या बंद, पूरे नेटवर्क पर कसा शिकंजा

देहरादून। साइबर अपराधियों के खिलाफ उत्तराखंड पुलिस ने प्रदेशव्यापी अभियान चलाकर ठगी के पूरे नेटवर्क पर बड़ा प्रहार किया है। पुलिस ने ठगी करने वालों के साथ ही ठगी की रकम रखने, निकालने और अपराध में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल, सिम और अन्य संसाधन उपलब्ध कराने वालों पर भी कार्रवाई की है।

 

अभियान के दौरान साइबर अपराध से जुड़े 820 संदिग्ध बैंक खातों का सत्यापन किया गया, जिनके आधार पर 159 मुकदमे दर्ज किए गए। वहीं 1,236 एटीएम से रकम निकासी के मामलों और स्थानों का सत्यापन कर 32 मुकदमे दर्ज किए गए। 84 चेक से रकम निकासी के मामलों के सत्यापन में 37 मुकदमे दर्ज हुए। इसके अलावा 22 संदिग्ध सिम विक्रेताओं का सत्यापन कर 10 मुकदमे दर्ज किए गए।

 

पुलिस ने 644 संदिग्ध सिम और 630 मोबाइल पहचान संख्या बंद कराईं तथा 442 संदिग्ध मामलों का सत्यापन किया। अभियान के दौरान 10 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया।

 

पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर चलाए गए अभियान से पहले एक जुलाई से 31 जुलाई तक साइबर अपराध से जुड़े डिजिटल, दूरसंचार और वित्तीय आंकड़ों का तकनीकी विश्लेषण किया गया। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र, दूरसंचार विभाग, भारतीय रिजर्व बैंक और अन्य संस्थाओं से प्राप्त जानकारी के आधार पर संदिग्ध बैंक खातों, सिम, मोबाइल पहचान संख्या, एटीएम और चेक से रकम निकासी वाले स्थानों की पहचान की गई।

 

इसके बाद 24 अगस्त से एक सितंबर तक चिन्हित स्थानों पर व्यापक कार्रवाई की गई। हरिद्वार में पुलिस ने ‘नवादा गिरोह’ का पर्दाफाश कर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच में 200 से अधिक बैंक खातों की कड़ियां सामने आईं। आरोपियों से 45 से अधिक एटीएम कार्ड, 20 बैंक पासबुक, दो लैपटॉप और 17 मोबाइल बरामद किए गए।

 

वर्ष 2026 में 240 साइबर अपराधियों की अंतरराज्यीय स्तर पर पहचान और मिलान से 100 से अधिक दूसरे राज्यों से जुड़ी कड़ियां सामने आई हैं। वहीं 1930 हेल्पलाइन और राष्ट्रीय साइबर अपराध शिकायत पोर्टल पर मिली 18,749 शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए करीब 23.44 करोड़ रुपये की ठगी की रकम को बचाया या रोक लिया गया।