20 रुपये की रिश्वत मामले में 27 साल बाद पुलिसकर्मी को हाई कोर्ट से मिला इंसाफ, बरी होने की रात ही हुई मौत, न्याय की देरी ने छीना सुकून

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अहमदाबाद। महज 20 रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में 27 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ने वाले एक तत्कालीन पुलिसकर्मी को आखिरकार गुजरात हाई कोर्ट से इंसाफ तो मिला, लेकिन यह इंसाफ उसकी जिंदगी का आखिरी अध्याय बन गया। हाई कोर्ट से बरी होने के कुछ ही घंटों बाद उसकी प्राकृतिक कारणों से मौत हो गई। यह घटना न सिर्फ व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि न्याय की देरी की कीमत भी दिखाती है।

मामला वर्ष 1997 का है, जब अहमदाबाद के वेजलपुर क्षेत्र में ड्यूटी पर तैनात पुलिस कॉन्स्टेबल पर 20 रुपये की रिश्वत लेने का आरोप लगा था। एंटी करप्शन ब्यूरो ने उस समय जाल बिछाकर कार्रवाई की, जिसके बाद उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ।

लंबी सुनवाई के बाद वर्ष 2004 में अहमदाबाद जिला न्यायालय ने उसे दोषी ठहराते हुए तीन साल की सजा सुनाई। इसके खिलाफ उसने गुजरात हाई कोर्ट में अपील दायर की। 27 साल बाद गुजरात हाई कोर्ट ने सभी साक्ष्यों की समीक्षा करते हुए रिश्वत मांगने और लेने के पुख्ता सबूत न होने की बात कही और जिला अदालत का फैसला रद्द कर दिया।

फैसले से खुश होकर पुलिसकर्मी ने कहा था कि उसके जीवन से कलंक हट गया है, लेकिन उसी रात उसकी अचानक मौत हो गई। इंसाफ मिला, पर उसका सुख भोगने का मौका नहीं मिला।

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