धान खरीद सीजन 2025 में उधम सिंह नगर के बाजपुर क्षेत्र से बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। यहां एक राइस मिल ने किसानों से एक दाना धान खरीदे बिना ही पोर्टल पर 10 हजार टन खरीद का फर्जी रिकार्ड दर्ज कर दिया। इससे सरकार को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया, वहीं किसानों को भी बाजार में सही कीमत नहीं मिल सकी।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह राइस मिल धरातल पर अस्तित्व में ही नहीं है। नैनीताल स्टेट हाइवे पर दिखाए गए पते पर निरीक्षण के दौरान सिर्फ टीन शेड, दीवारें और घास-फूस मिले। न मशीनें हैं, न गतिविधि और न ही मिल का कोई बोर्ड। इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों ने इस मिल को पोर्टल कोड जारी कर दिया, जिससे अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप गहराते जा रहे हैं।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार मिल में बाहरी राज्यों—यूपी, बिहार आदि—और अन्य जिलों से धान ट्रकों के माध्यम से मंगाया जाता था। इसे कुछ दिन रखकर दूसरी मिलों में ट्रांसफर कर दिया जाता था। बाद में इसी धान को स्थानीय किसानों की खरीद दिखाकर एमएसपी पर बेचकर अवैध कमाई की जाती थी।
इस फर्जीवाड़े में कई गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं—
बिना शारीरिक निरीक्षण के पोर्टल कोड जारी करना,
10 हजार टन जैसी बड़ी एंट्री का सत्यापन न होना,
मंडियों में धान न आने की रिपोर्ट की अनदेखी,
कागजों में ही मिल निरीक्षण दिखाना।
इन सभी पहलुओं से विभागीय भ्रष्टाचार और मिलीभगत की आशंका मजबूत हो रही है। किसान सस्ते दामों पर धान बेचने को मजबूर होते रहे, जबकि कुछ मुनाफाखोर पोर्टल पर फर्जी खरीद दर्शाकर सरकारी धन की लूट में लगे थे।
कई किसान संगठनों ने मामले की एसआईटी या विजिलेंस जांच, पोर्टल एंट्री का विशेष ऑडिट, मिलर्स व आढ़तियों के बैंक खातों की जांच और दोषी अधिकारियों के निलंबन व एफआईआर की मांग की है। कृषि खरीद व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और क्षेत्र में आक्रोश व्याप्त है।



