“तीन माह से बेखबर पिता…“डी.डी. चौक पर दो बहनें हाथों में पिता की तस्वीर लिए बोलीं, ‘क्या आपने हमारे पापा को देखा है?

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डी.डी. चौक पर बहनों की पुकार — “हमारे पापा को ढूंढ दो”

 

रुद्रपुर। शहर के दिल कहलाने वाले डी.डी. चौक पर रविवार दोपहर का नज़ारा कुछ अलग था। भीड़ के बीच दो मासूम बेटियां अपने लापता पिता की तस्वीर थामे खड़ी थीं — आंखों में आंसू, चेहरे पर थकान और दिल में उम्मीद। राहगीरों से वे बस एक ही बात कह रहीं थीं — “कृपया हमारे पापा को ढूंढने में मदद करें…”

 

जानकारी के मुताबिक शत्रुघ्न मदेशिया, निवासी महादनपुर सिहुलिया सुकरौली बाजार, थाना हाटा, जनपद कुशीनगर (उत्तर प्रदेश), कई वर्षों से पंतनगर में ठेकेदारी का काम कर रहे थे। करीब तीन महीने पहले वे अपनी पत्नी किरन को ससुराल छोड़ने गए थे। चार अगस्त को गोरखपुर से रवाना होकर पांच अगस्त को लौटने की बात कही थी, लेकिन उसके बाद से उनका कोई अता-पता नहीं है।

 

परिवार ने गोरखपुर, कुशीनगर से लेकर अयोध्या तक तलाश की। कुछ दिन बाद अयोध्या के पास उनका मोबाइल और पर्स बरामद हुआ, पर खुद शत्रुघ्न का कोई सुराग नहीं लगा। कुशीनगर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर जांच तो शुरू की, मगर तीन महीने बीत गए, फिर भी उम्मीदें अधूरी रहीं।

 

अब पिता की तलाश में उनकी दोनों बेटियां अपने चाचा भानू मदेशिया के साथ जगह-जगह भटक रही हैं — कुशीनगर, अयोध्या, पंजाब से लेकर अब रुद्रपुर तक। रविवार को वे डी.डी. चौक और रोडवेज स्टेशन पर लोगों से मिलती रहीं, पिता की फोटो दिखाती रहीं और हर किसी से पूछती रहीं —

“क्या आपने हमारे पापा को कहीं देखा है?”

 

उनकी बेबसी ने राहगीरों की आंखें भी नम कर दीं। ठेकेदार शत्रुघ्न के घर की रौनक अब सिर्फ इन बेटियों की पुकार में सिमट गई है —

“पापा, जहां भी हैं… एक बार लौट आओ।”

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