15 हजार से ज्यादा शिक्षकों की नौकरी पर लटकी तलवार,  टीईटी परीक्षा पास करने की अनिवार्यता के चलते रिटायरमेंट की उम्र में नौकरी बचाने की चुनौती

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हल्द्वानी। राज्य के शिक्षा विभाग में 15 हजार से ज्यादा शिक्षकों की नौकरी पर तलवार लटक गई है। वह नौकरी में रहेंगे या नहीं इस पर संकट मडरा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को नौकरी बरकरार रखने और पदोन्नति के लिए अनिवार्य करने से ये स्थिति खड़ी हो गई है। खासकर वह शिक्षक जो 20 से 25 साल की नौकरी कर चुके हैं। अब टीईटी की अनिवार्यता ने उनको टेंशन में डाल दिया है।

हल्द्वानी में एक सरकारी स्कूल में तैनात 49 साल की शिक्षिका गीतिका बताती हैं की वह 22 साल से छात्र-छात्राओं को पढ़ा रही हैं। 2003 में बीटीसी पूरी करने के बाद प्राइमरी स्कूल में नौकरी की। तैनाती नियमों के तहत हुई। कहा 11 साल बाद उनका रिटायरमेंट है। अब नौकरी बचाने के लिए टीईटी परीक्षा पास करने की बात सामने आ रही है। यह ठीक नहीं है? ऐसे ही शिक्षिका दीपिका ने बताया कि बीटीसी, सीपीएड, डीपीएड, उर्दू के वह शिक्षक, जिनको उस वक्त इंटर पास के बाद नौकरी मिली है। अब उनके लिए 15 से 20 साल की नौकरी के बाद परीक्षा देना बेहद चुनौतीपूर्ण है। कहा कि वर्षों की सेवा और अनुभव के बावजूद यदि उन्हें केवल एक परीक्षा के आधार पर अयोग्य करार दिया गया तो यह उनके भविष्य और परिवार की आजीविका पर संकट ला सकता है।

इस फैसले ने बढ़ाई चिंता

शिक्षकों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत कक्षा एक से आठवीं तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना अनिवार्य होगा। यदि वे ऐसा नहीं करते हैं तो उनकी सेवा में निरंतरता और पदोन्नति के अवसर प्रभावित होंगे। वहीं जिन शिक्षकों की शेष सेवा अवधि पांच वर्ष से कम है, यदि वह टीईटी नहीं पास करते तो उन्हें पदोन्नति के अवसर के बिना ही कार्यकाल पूरा करना होगा।

इनका कहना:

कोर्ट के फैसले के बाद राज्य के 15,000 से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाओं की नौकरी खतरे में आ गई है। हम संगठन के माध्यम से सरकार से कोर्ट के फैसले पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं, ताकि शिक्षकों को राहत मिल सके। सभी शिक्षक योग्य हैं। नौकरी के 20-25 साल बाद परीक्षा कराना ठीक नहीं है।

डीएस पडियार, शिक्षक नेता, हल्द्वानी

 

जो भी नियम के तहत प्रक्रिया होगी। विभाग उस पर काम करेगा। अभी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बारे में पूरी जानकारी ली जा रही है।

अजय नौडियाल, निदेशक प्रारंभिक शिक्षा उत्तराखंड

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