देहरादून।
विदेश में नौकरी और पढ़ाई का सपना देखने वाले युवाओं को ठगी का शिकार बनाने वाले गिरोह एक बार फिर बेनकाब हुए हैं। देहरादून में सामने आए 10 अलग-अलग मामलों में कुल 19 युवाओं को 48 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी का शिकार बनाया गया। सभी शिकायतें फाइनेंशियल फ्रॉड यूनिट द्वारा जांची गईं, जिसमें आरोपियों द्वारा व्यवस्थित रूप से युवाओं को विदेश भेजने के नाम पर ठगने की पुष्टि हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी देहरादून अजय सिंह ने सभी मामलों में तत्काल मुकदमा दर्ज करने के निर्देश जारी किए हैं।
सबसे पहला मामला क्लेमेनटाउन निवासी नितिन पोखरियाल का है, जिन्होंने आरोप लगाया कि अरुण प्लेसमेंट सर्विस नाम की कंपनी ने इटली में नौकरी का झांसा देकर उन्हें फर्जी वीज़ा, टिकट और जॉब लेटर थमा दिए तथा 3 लाख 4 हजार रुपये ले लिए। जांच में पता चला कि यह कंपनी न तो किसी अधिकृत सूची में थी और न ही उसके दस्तावेज मान्य पाए गए।
दूसरे मामले में टिहरी गढ़वाल के जितेंद्र और विक्रम सिंह रौतेला ने शिकायत की कि आशीष रतूड़ी नामक व्यक्ति ने पोलैंड भेजने के नाम पर 3 लाख 80 हजार रुपये वसूले और बाद में फर्जी वर्क परमिट जारी कर दिया। युवकों को पता चला कि न तो वीज़ा फाइल हुई और न ही उनके नाम किसी कंपनी की सूची में दर्ज थे।
तीसरा मामला गढ़ी कैंट निवासी ऋचा वर्मा से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि अपग्रेड कंपनी ने उन्हें जर्मनी की “गोल्डन गेट यूनिवर्सिटी” में पढ़ाई के लिए भेजने का वादा किया। लेकिन उनसे लिए गए 5 लाख 15 हजार रुपये के बाद कोई प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई गई। सभी दस्तावेज़ फर्जी पाए गए।
चौथे मामले में धर्मपुर निवासी नलिन मुलानी ने शिकायत की कि विक्रम गुसाई ने DIHM के छात्रों को विदेश में नौकरी दिलाने का दावा किया था। छात्रों से लिए गए कुल 19,19,189 रुपये किसी भी आधिकारिक प्रोसेस में उपयोग नहीं किए गए और फर्जी वीजा उपलब्ध कराया गया।
पांचवें मामले में नैनीताल के राजेंद्र सिंह और उत्तरकाशी के अनिल सिंह ने अर्शिका खान और आशीष रतूड़ी पर सऊदी अरब भेजने का आरोप लगाया। वहां न तो नौकरी दी गई, बल्कि युवकों के साथ शारीरिक उत्पीड़न तक किया गया। बाद में दोनों को वापस लौटने पर अपनी ठगी का पता चला।
छठे मामले में रणधीर सिंह नेगी और उनके पांच साथियों ने आरोप लगाया कि जय किशन नौटियाल ने न्यूजीलैंड भेजने का झांसा देकर 1 लाख 60 हजार रुपये ले लिए, जबकि कोई प्रोसेस शुरू ही नहीं की गई थी।
सातवें मामले में अजबपुर कलां निवासी धर्मवीर भंडारी ने बताया कि कैप्टन अनिल ने दुबई में नौकरी दिलाने का दावा किया और 52 हजार रुपये वसूल लिए।
आठवें मामले में मोहम्मद शान ने बताया कि बिजनौर निवासी मोहम्मद बिलाल सिद्दीकी ने विदेश में नौकरी दिलाने का झांसा देकर 1 लाख 40 हजार रुपये ठग लिए।
नौवें मामले में धन सिंह थापा, मीन बहादुर गुरुंग, सागर थापा और धीरज गुरुंग ने बताया कि चित्रा प्रसाद और गुडविन सिंह ने चारों से कुल 9 लाख 61 हजार रुपये वसूल कर उन्हें फर्जी दस्तावेज़ दिए।
जांच में सभी आरोप सही पाए जाने पर एसएसपी ने कड़े निर्देश दिए हैं कि विदेश भेजने के नाम पर किसी भी प्रकार की ठगी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने युवाओं से अपील की कि किसी भी एजेंसी से डील करने से पहले उसकी वैधता भारत सरकार के emigrate portal पर अवश्य जांचें और वीजा, जॉब लेटर, टिकट जैसे सभी दस्तावेज संस्था से सीधे वेरीफाई करें।
एसएसपी ने कहा, “सचेत रहें, जांच करें और किसी भी एजेंसी को बिना सत्यापन पैसे न दें। जागरूकता ही ठगी से बचा सकती है।”




