उत्तराखंड ग्रीन हाइड्रोजन नीति को मिली मंजूरी, साल 2030 तक हर साल 100 किलोटन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता का लक्ष्य।

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उत्तराखंड ग्रीन हाइड्रोजन नीति को मिली मंजूरी, साल 2030 तक हर साल 100 किलोटन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता का लक्ष्य।

 

रिपोर्ट  गोपी सरकार

 

देश दुनिया में ग्लोबल वार्मिंग एक गंभीर समस्या बनी हुई है जिसको देखते हुए तमाम देश कार्बन उत्सर्जन को कम करने पर जोर दे रहे हैं। इसी क्रम में भारत सरकार भी साल 2070 तक जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। जिसके तहत तमाम तरह के पहल भी किया जा रहे हैं। इसी क्रम में भारत सरकार ने साल 2022 में राष्ट्रीय हाइड्रोजन नीति और साल 2023 में राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन को जारी किया था। जिसके क्रम में उत्तराखंड सरकार ने भी उत्तराखंड हरित हाइड्रोजन पॉलिसी, 2026 तैयार की है। इस नीति पर 28 जनवरी को हुई मंत्रिमंडल की बैठक के दौरान मंजूरी मिल गई है।

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दरअसल, ग्रीन हाइड्रोजन एक जीरो इमीशन ईधन है, जो पारम्परिक जीवाश्म ईंधनों की तुलना में ग्लोबल वार्मिंग को घटाने में मदद करता है। इस नीति के प्रख्यापन के बाद ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन से नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलेगी। उत्तराखण्ड राज्य में जल और सौर ऊर्जा जैसे प्राकृतिक संसाधन बड़ी मात्रा में मौजूद हैं। जिनका इस्तेमाल हरित हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए किया जा सकता है। इससे राज्य में स्टील, रिफाइनरी, उर्वरक, सीमेंट जैसे भारी उद्योगों में ग्रीन हाइड्रोजन के उपयोग को बढ़ावा, नवीनतम तकनीकी विकास, अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहन के साथ ही स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा मिलेगा।

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ग्रीन हाइड्रोजन नीति न केवल पर्यावरण सुधार का जरिए है बल्कि ये आर्थिक, ऊर्जा, रणनीति और तकनीकी दृष्टिकोण से राज्य के लिए अनिवार्य एवं दूरदर्शी कदम है। नीति के तहत उत्तराखण्ड राज्य में साल 2030 तक 100 किलोटन हर साल हरित हाइड्रोजन उत्पादन की क्षमता का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही परियोजना का आवंटन नामांकन के आधार पर केन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र इकाईयों या राज्य सार्वजनिक क्षेत्र इकाईयों को और प्रतिस्पर्धी बोली के जरिए निजी विकासकर्ताओं को आवंटित किया जायेगा।

वित्त विभाग, नीति में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) नीति 2023, मेगा औद्योगिक एवं निवेश नीति (संशोधित) 2021 और अनुकूलित प्रोत्साहन पैकेज दिशानिर्देश (संशोधित) 2023 में किए गए प्रोत्साहन प्रावधान पर सहमत है। राज्य सरकार की और से राज्य में ट्रांसमिशन शुल्क एवं व्हीलिंग शुल्क में 50 प्रतिशत छूट के साथ ही विद्युत शुल्क, अतिरिक्त अधिभार और क्रॉस सब्सिडी अधिभार में 100 प्रतिशत छूट दिये जाने का निर्णय लिया है। इससे राज्य सरकार पर प्रति मेगावाट लोड पर हर साल करीब 1.21 करोड़ का व्यय भार पड़ेगा।

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वही, ज्यादा जानकारी देते हुए ऊर्जा विभाग के प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि ग्रीन हाइड्रोजन एक नवीन ऊर्जा है, और भविष्य की एक ऊर्जा है यही वजह है कि भारत सरकार इसे प्रमोट कर रही है। इसके लिए भारत सरकार ने साल 2023 में राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को शुरू किया था। साथ ही देश के सभी राज्यों को इस बाबत मोटिवेट किया था कि सभी राज्य हरित हाइड्रोजन को प्रमोट करने के लिए पॉलिसी तैयार करें। इसके बाद देश के करीब 6-7 राज्यों ने ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी तैयार कर ली है। इसी क्रम में उत्तराखंड राज्य ने भी उत्तराखंड हरित हाइड्रोजन पॉलिसी, 2026 तैयार की है। इस पॉलिसी के तहत रिन्यूएबल एनर्जी से ही हाइड्रोजन का प्रोडक्शन यानी उत्पादन किया जाएगा

साथ ही बताया कि ग्रीन हाइड्रोजन का इस्तेमाल, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में किया जा रहा है। इसके साथ ही यह ट्रांसपोर्टेशन फ्यूल के रूप में भी काम आएगा। वर्तमान समय में शिप में भी शिपिंग फ्यूल के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। भविष्य की बात करें तो आने वाले समय में ट्रेन से लेकर ट्रक और एयरक्राफ्ट में भी फ्यूल के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि, वर्तमान समय में एक एक्सपेरिमेंट के रूप में इंडियन रेलवे ने हरियाणा में एक ग्रीन हाइड्रोजन ट्रेन संचालित किया है। उत्तराखंड सरकार ने जो पॉलिसी तैयार की है उसमें तमाम तरह के सब्सिडी का भी प्रावधान किया गया है। साथ ही बताया कि पॉलिसी में जो सब्सिडी का प्रावधान किया गया है, उसपर कैबिनेट में चर्चा किया गया है। साथ ही निर्णय लिया गया है कि सब्सिडी दिया जाना है या फिर नहीं दिया जाना है, सब्सिडी अगर दिया जाएगा तो कितना दिया जाएगा और कितने साल के लिए दिया जाएगा। इसके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने के निर्देश मंत्रिमंडल ने दिए हैं।

ग्रीन हाइड्रोजन पॉलिसी में प्रोत्साहन के मुख्य बिंदु…….

1) हरित हाइड्रोजन संयंत्रों में उपयोग के लिए नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों से प्राप्त विद्युत के लिए राज्य में ट्रांसमिशन शुल्क (Intra State Transmission Charges) और व्हीलिंग शुल्क (Wheeling Charges) में 50 प्रतिशत की छूट।

2) नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों से प्राप्त विद्युत पर अतिरिक्त अधिभार (Additional Surcharge), Electricity Duty और क्रॉस सब्सिडी अधिभार (Cross Subsidy Surcharge) में 100 प्रतिशत छूट।

3) सौर, पंप स्टोरेज, जलविद्युत परियोजनाओं के लिए राज्य की प्रचलित नीतियों के तहत उपलब्ध प्रोत्साहन, पात्र हरित हाइड्रोजन संयंत्रों को बिजली की आपूर्ति के लिए स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के लिए लागू रहेंगे।

4) हरित हाइड्रोजन संयंत्रों को उद्योग माना जाएगा और वे राज्य की सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) नीति 2023, मेगा औद्योगिक और निवेश नीति 2021 और अनुकूलित प्रोत्साहन पैकेज दिशानिर्देश 2023 (समय-समय पर यथासंशोधित) में दिए गए प्रोत्साहन और समर्थन का लाभ, लागू नीति में दिए गए प्राविधानों के अनुपालन के अधीन, लेने के हकदार होंगे।

 

5) समय पर वैधानिक स्वीकृति प्राप्त करने के लिए एकल खिड़की मंजूरी (Single Window Clearance) उपलब्ध कराई जाएगी।

6) यूपीसीएल/पिटकुल हरित हाइड्रोजन संयंत्र से निर्बाध गुणवत्ता वाली विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त पारेषण (Transmission) और वितरण नेटवर्क स्थापित या बेहतर करेगें।

7) भविष्य में यदि हरित हाइड्रोजन का उपयोग वाहनों के लिए ईंधन के रूप में किया जाएगा, तो इलैक्ट्रिक बैट्री आधारित, सौर आधारित, सीएनजी आधारित वाहनों और हाईब्रिड प्रकार के वाहनों के समान देय मोटरयान कर के भुगतान में राज्य सरकार की ओर से छूट प्रदान किये जाने पर विचार किया जा सकता है।

8) विकासकर्ताओं को भूमि आवंटन, राजस्व विभाग के शासनादेश के अधीन की जाएगी।

9) नीति के तहत 31 दिसम्बर, 2030 तक चालू होने वाली परियोजनाओं के लिए प्रोत्साहन, परियोजना के वणिज्यिक संचालन तिथि (सीओडी) से 10 सालों के लिए लागू रहेंगें।

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